गीताप्रेस ने जनमानस को धर्म और संस्कृति से जोड़कर रखा : राष्ट्रपति

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गोरखपुर:-राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि लगभग 100 वर्षों से गीताप्रेस ने भारत के जनमानस को धर्म व संस्कृति से जोड़े रखने का कार्य किया है। गीताप्रेस का प्रकाशन संस्कृत व हिंदी के अलावा अनेक भाषाओं में उपलब्ध है। ओड़िया भागवत के नाम से विख्यात अतिबड़ी जगन्नाथ दास द्वारा रचित भागवत महापुराण को ओडिशा के लोग सम्मान से पढ़ते हैं।

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वे महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के लोकार्पण के बाद वहां मौजूद जनसमूह को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि गोरखपुर में कुछ वर्षों से इंफ्रास्ट्रक्चर का बहुत तेज गति से विकास हो रहा है।

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राष्ट्रपति ने कहा कि नाथ परंपरा के योगियों ने चिकित्सा के लिए खनिजों व धातुओं पर आधारित भस्म की खोज की थी। हठयोग की प्रतिष्ठा करके महायोगी गोरखनाथ ने राष्ट्र का समग्र पुनर्जागरण किया है। योग के क्षेत्र में गुरु गोरक्षनाथ की महानता को समझाने के लिए गोस्वामी तुलसीदास ने कहा था गोरख जगायो जोग यानी गुरु गोरखनाथ ने योग की परंपरा को फिर से जगाया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महायोगी गुरु गोरखनाथ की चर्चा करते हुए कहा कि उनके बारे में कहा गया है कि आदि गुरु शंकराचार्य के बाद इतना प्रभावशाली महापुरुष भारत में दोबारा नहीं हुआ।

राष्ट्रपति से मिला गीताप्रेस का प्रतिनिधिमंडल

गोरखपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से गीताप्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार सुबह सर्किट हाउस में मुलाकात कर उड़िया भाषा की पुस्तकें भेंट की। इस मौके पर गीता प्रेस के प्रबंधक लालमणि तिवारी और ट्रस्टी देवीदयाल अग्रवाल आदि मौजूद रहे। संवाद

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