श्रीराम कथा में मानस चातकी द्वारा अमृतमयी वर्षा
भारत की लगाम न्यूज़ आलापुर (अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश)। अवध प्रांत के अंबेडकर नगर जनपद के आलापुर क्षेत्र स्थित चांडीपुर की पावन भूमि पर महादानवीर मोरध्वज मंदिर (आश्रम) में धार्मिक अनुष्ठान एवं यज्ञ का आयोजन श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ किया जा रहा है। इस धार्मिक आयोजन में विद्वान आचार्यों, संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं की सहभागिता देखने को मिल रही है। वहीं, श्रीराम कथा के दौरान मानस चातकी द्वारा भक्तों को रामकथा का अमृतमय रसपान कराया जा रहा है।

प्राचीन धार्मिक परंपरा और साधना का केंद्र है मोरध्वज मंदिर
मोरध्वज मंदिर (आश्रम) के प्रधान पीठाधीश्वर महंत स्वामी श्री रामदास जी महाराज के अनुसार, यह स्थल प्राचीन धार्मिक परंपराओं, साधना और आध्यात्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। मान्यता है कि इस पावन भूमि पर अनेक संतों, महात्माओं, नागा बाबाओं और तपस्वियों ने ध्यान, योग, ज्ञान एवं तपस्या के माध्यम से अपना जीवन समर्पित किया।

आश्रम परिसर में भगवान शिव-पार्वती, माता दुर्गा और हनुमान जी की प्राचीन प्रतिमाएं श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। बताया जाता है कि सरयू नदी के किनारे स्थित इस क्षेत्र में प्राचीन साधना स्थलों और गुफाओं की परंपरा भी जुड़ी हुई है, जो भक्तों और आध्यात्मिक जिज्ञासुओं को आकर्षित करती है।





नियमित पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान
स्वामी श्री रामदास जी महाराज के अनुसार, आश्रम में आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण के लिए नियमित पूजा-पाठ, आरती, गायत्री संध्या उपासना, रामचरितमानस पाठ, श्री हनुमान चालीसा, 
आश्रम का परिसर लगभग 22 बीघा भूमि में फैला हुआ बताया गया है। मां सरयू नदी की निकटता इस स्थल की धार्मिक महत्ता को और विशेष बनाती है। पुजारी हरिदास जी महाराज एवं पुजारी बाबूलाल जी महाराज ने बताया कि इस धार्मिक स्थल पर देश-प्रदेश के श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय लोगों का सहयोग, सेवा और समर्पण निरंतर बना रहता है।
28 अक्टूबर को होगा यज्ञ का समापन, महाभंडारे का आयोजन
आयोजकों के अनुसार, 28 अक्टूबर 2026 को यज्ञ के समापन अवसर पर महाभंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर सभी श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रीय आमजन को आमंत्रित किया गया है, ताकि वे धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होकर प्रसाद ग्रहण कर सकें
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आयोजन का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं के संरक्षण, आध्यात्मिक चेतना के प्रसार और समाज में सेवा, समर्पण एवं सद्भाव की भावना को मजबूत करना है।
(BKL News Network, Mumbai)






