वाराणसी के मुमुक्ष आश्रम में शारदीय नवरात्रि पर दो दिवसीय महाभंडारे का आयोजन, हजारों संत-महात्माओं ने ग्रहण किया प्रसाद

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वाराणसी/अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश :- शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर श्री मुमुक्ष आश्रम, थानेश्वरम, घिनहापुर के प्रधान पीठाधीश्वर स्वामी सत्यव्रत ब्रह्मचारी जी महाराज के मार्गदर्शन में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी वाराणसी स्थित मुमुक्ष आश्रम में दो दिवसीय महाभंडारे का आयोजन किया गया। इस धार्मिक आयोजन में संत-महात्माओं, साधु-संन्यासियों और योगियों की सेवा की गई। आयोजन में बड़ी संख्या में संतों एवं श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

धार्मिक परंपराओं और संत सेवा को समर्पित इस महाभंडारे का उद्देश्य साधु-संतों का सम्मान करना तथा सेवा, श्रद्धा और आध्यात्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाना रहा। बताया गया कि इस दो दिवसीय आयोजन में प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में संत-महात्मा, योगी और संन्यासी शामिल होते हैं।

मोरध्वज मंदिर परिसर में आयोजित यज्ञ में शामिल हुए स्वामी सत्यव्रत ब्रह्मचारी जी महाराज

इसी क्रम में अंबेडकर नगर जिले की पवित्र भूमि पर स्थित मोरध्वज मंदिर के प्रांगण में आयोजित यज्ञ कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान स्वामी सत्यव्रत ब्रह्मचारी जी महाराज से BKL News Network, मुंबई, महाराष्ट्र के संपादक ने वार्ता की। इस दौरान आश्रम की धार्मिक गतिविधियों, संत सेवा और क्षेत्र की आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।

धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है मुमुक्ष आश्रम

उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में स्थित मुमुक्ष आश्रम, थानेश्वरम, घिनहापुर को बाबा ब्रह्मचारी जी की कुटिया के नाम से भी जाना जाता है। यह आश्रम लंबे समय से धार्मिक आस्था और साधना का केंद्र रहा है। यहां वर्षभर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता रहता है, जिनमें दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

आश्रम की तपोस्थली पर प्रतिवर्ष अक्षय नवमी के अवसर पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालु यहां दर्शन-पूजन कर आध्यात्मिक शांति और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

मोरध्वज की पावन भूमि का भी है विशेष धार्मिक महत्व

अंबेडकर नगर जिले में स्थित मोरध्वज की पौराणिक कीर्तिस्थली धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां आयोजित धार्मिक अनुष्ठान क्षेत्र की प्राचीन परंपराओं और आस्था को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कैसे पहुंचें मुमुक्ष आश्रम: उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आश्रम थाना राजेसुल्तानपुर से लगभग तीन किलोमीटर उत्तर दिशा में स्थित है।

इस प्रकार शारदीय नवरात्रि के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय महाभंडारा संत सेवा, धार्मिक आस्था और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण का संदेश देने वाला आयोजन रहा।

रिपोर्ट: BKL News Network, मुंबई, महाराष्ट्र

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