
आशुतोष सनातनी हिन्दू ने एक महत्वपूर्ण बात कही है कि पृथ्वी के जल के ऊपर टिके रहने का कारण जंगलों में विचरती हुई गौमाता, ब्राह्मण, सती स्त्री, संत, वनस्पति व स्व-धर्म परायण मनुष्य भी हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से जिनका भी ह्रास होता जायेगा, पृथ्वी की धारण शक्ति कमजोर होती जायेगी।
पृथ्वी की धारण शक्ति
पृथ्वी की धारण शक्ति का अर्थ है कि पृथ्वी अपनी सभी जीव-जन्तुओं और वनस्पतियों को सहारा देने में सक्षम है। यह शक्ति पृथ्वी के प्राकृतिक संतुलन पर निर्भर करती है, जो जंगलों, नदियों, पहाड़ों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से बनी रहती है।
गौमाता और पृथ्वी की धारण शक्ति
गौमाता को सनातन धर्म में एक पवित्र प्राणी माना जाता है। गौमाता की रक्षा और संरक्षण से पृथ्वी की धारण शक्ति मजबूत होती है। गौमाता के गोबर और मूत्र से जैविक खाद बनती है, जो खेती के लिए बहुत उपयोगी होती है।
ब्राह्मण और पृथ्वी की धारण शक्ति
ब्राह्मण को सनातन धर्म में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। ब्राह्मणों की भूमिका है कि वे धर्म और संस्कृति की रक्षा करें और लोगों को सही मार्गदर्शन दें। ब्राह्मणों के आशीर्वाद और पूजा-पाठ से पृथ्वी की धारण शक्ति मजबूत होती है।
सती स्त्री और पृथ्वी की धारण शक्ति
सती स्त्री को सनातन धर्म में एक आदर्श माना जाता है। सती स्त्री की पवित्रता और निष्ठा से पृथ्वी की धारण शक्ति मजबूत होती है। सती स्त्री के आशीर्वाद और प्रेम से परिवार और समाज में सुख-शांति बनी रहती है।
संत और पृथ्वी की धारण शक्तिट
संत को सनातन धर्म में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। संतों की भूमिका है कि वे लोगों को सही मार्गदर्शन दें और धर्म और संस्कृति की रक्षा करें। संतों के आशीर्वाद और उपदेश से पृथ्वी की धारण शक्ति मजबूत होती है।
वनस्पति और पृथ्वी की धारण शक्ति
वनस्पति पृथ्वी के जीवन का आधार है। वनस्पति से हमें ऑक्सीजन मिलती है और जलवायु संतुलित रहती है। वनस्पति की रक्षा और संरक्षण से पृथ्वी की धारण शक्ति मजबूत होती है।
स्व-धर्म परायण मनुष्य और पृथ्वी की धारण शक्ति
स्व-धर्म परायण मनुष्य वे होते हैं जो अपने धर्म और संस्कृति के अनुसार जीवन जीते हैं। स्व-धर्म परायण मनुष्यों की भूमिका है कि वे धर्म और संस्कृति की रक्षा करें और समाज में सुख-शांति बनाए रखें। स्व-धर्म परायण मनुष्यों के आशीर्वाद और कर्म से पृथ्वी की धारण शक्ति मजबूत होती है।
निष्कर्ष
आशुतोष सनातनी हिन्दू की बात से यह स्पष्ट होता है कि पृथ्वी की धारण शक्ति जंगलों में विचरती हुई गौमाता, ब्राह्मण, सती स्त्री, संत, वनस्पति व स्व-धर्म परायण मनुष्य पर निर्भर करती है। इनकी रक्षा और संरक्षण से पृथ्वी की धारण शक्ति मजबूत होती है और पृथ्वी पर जीवन सुखी और समृद्ध रहता है।






