भारत की लगाम न्यूज़:- समय के पहिए पर छह साल का लंबा अरसा गुजर गया, लेकिन पूर्णिया जिले के धमदाहा प्रखंड अंतर्गत मलडीहा गांव की पगडंडियों और गलियों में आज भी एक नाम पूरी शिद्दत के साथ जिंदा है—’गुलशन’। यही वह लाडला नाम था, जिससे परिवार के बुजुर्ग और गांव के हमउम्र साथी बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत को पुकारते थे।
कभी इन्हीं गलियों में उनकी चहलकदमी थी, गांव के खुले मैदान में उनके बल्ला भांजने पर चौके-छक्कों की गूंज थी और बाबा वरुणेश्वर धाम समेत स्थानीय मंदिरों में उनके शीश नवाने से पूरा गांव उत्सव में डूब गया था।
आज वही गलियां शांत हैं, लेकिन अपने ‘गुलशन’ की याद आते ही ग्रामीणों की आंखें नम हो जाती हैं। अब जब बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में नए सिरे से प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की है, तो मलडीहा के बाशिंदों के बीच भी इंसाफ की धीमी पड़ चुकी लौ फिर से प्रज्वलित हो गई है।
हालांकि, जांच एजेंसियों द्वारा दोनों मामलों के बीच अब तक किसी सीधे आपराधिक तार की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन गांव वालों को उम्मीद है कि नई कड़ियों के खुलने से सच सामने जरूर आएगा।
2019 की वह यादगार यात्रा
साल 2019 की गर्मियों की वह याद आज भी मलडीहा के हर बच्चे और बुजुर्ग के जेहन में किसी सुनहरे चलचित्र की तरह चस्पां है। सुशांत जब अपने पैतृक गांव पहुंचे थे, तो समूचा इलाका एक बड़े मेले और उत्सव में तब्दील हो गया था। आसपास के जिलों से हजारों की तादाद में प्रशंसक अपने चहेते सितारे की एक झलक पाने को उमड़ पड़े थे। सुशांत ने भी स्टारडम की चकाचौंध को किनारे रख गांव वालों के साथ ठेठ देसी अंदाज में समय बिताया था।
जब गांव लौटा था मलडीहा का लाल
उन्होंने गांव के कुलदेवता और प्रसिद्ध बाबा वरुणेश्वर धाम मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की थी। बचपन के साथियों के आग्रह पर जब सुशांत ने गांव के खुले मैदान में बल्ला थामा, तो ग्रामीणों के लिए वह पल किसी स्वप्न सरीखा था। उनके दोस्तों के अनुसार, सुशांत ने न केवल क्रिकेट का भरपूर आनंद लिया, बल्कि गगनचुंबी चौके-छक्के जड़कर सबका दिल जीत लिया था।
वह हमारे लिए स्टार नहीं, घर का गुलशन था’
सुशांत के चचेरे भाई पन्ना सिंह और चाचा बमबम सिंह आज भी जब उनकी बातें करते हैं, तो गला रुंध जाता है। वे कहते हैं कि सुशांत सिनेमाई दुनिया के लिए भले ही एक बहुत बड़ा नाम रहा हो, लेकिन इस आंगन के लिए वह हमेशा सीधा-सादा और सहज ‘गुलशन’ ही था। घर की चौखट पर बैठकर घंटों परिजनों से बतियाना, मिट्टी की खुशबू को महसूस करना और बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेना उनके स्वभाव में रचा-बसा था। उस ऐतिहासिक यात्रा के महज कुछ ही महीनों बाद सुशांत के चले जाने की खबर ने इस पूरे गांव को ऐसा गहरा जख्म दिया, जो आज भी ताजा है।
दिशा केस में नई जांच से गांव में जगी उम्मीद
दिशा सालियान की संदिग्ध मौत के मामले में अदालत के कड़े रुख के बाद सीबीआई द्वारा शुरू की गई तफ्तीश ने मलडीहा में एक बार फिर चर्चाओं का दौर शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि इस निष्पक्ष जांच में कोई नई कड़ी या सुराग निकलकर सामने आता है, तो संभव है कि सुशांत की मौत से जुड़े अनुत्तरित सवालों के जवाब भी देश के सामने आ सकें।
कलामंच बना स्मृति का प्रतीक
इधर, अपने होनहार सपूत की स्मृतियों को आने वाली पीढ़ियों की प्रेरणा बनाने के लिए ग्रामीणों ने पहल की है। इसी वर्ष अगस्त माह में मलडीहा में विधिवत ‘सुशांत सिंह राजपूत कलामंच’ का लोकार्पण किया गया। यह मंच सिर्फ ईंट-गारे का ढांचा नहीं, बल्कि उस माटी के बेटे के सपनों और उसकी असाधारण प्रतिभा को हमेशा जीवित रखने का एक भावनात्मक संकल्प है।





