गरबा विभिन्न मातृ देवियों के श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक: डा. सत्या पांडेय (पूर्व मेयर)
गोरखपुर: गरबा गुजरात का एक लोक नृत्य है ,जो नौ दिवसीय हिन्दू त्यौहार नवरात्री के दिन मनाया जाता है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न है। गरबा नृत्य विभिन्न मातृ देवियों के प्रति समर्पण को दर्शाता है। गरबा को सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है। गरबा नृत्य के दौरान स्त्रिया और पुरुष गोल घेरे में नृत्य कर मां दुर्गा को प्रसन्न करती है। गरबा नृत्य करने से पहले महिलाएं तीन ताली बजाकर भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रति अपनी श्रद्धा को व्यक्त करती है। ऐसा कहा जाता है कि तालियों की गूंज से मां भवानी प्रसन्न होती है। यह बातें स्वस्थ संस्था की तरफ से मुख्य अतिथि पूर्व मेयर में डॉ. सत्या पांडेय ने बताई ।उन्होंने बताया कि यह नृत्य धीरे-धीरे गुजरात से होकर उत्तर प्रदेश में काफी लोकप्रिय हो गया। आज यहां स्वर संस्था की अध्यक्ष और हमारी बहनों की तरफ से गरबा नृत्य का आयोजन किया जा रहा है। मैं अपनी प्यारी बहनों को दिल से धन्यवाद अर्पित करती हूं, जिन्होंने अपनी पुरानी विरासत और परंपरा को जीवित रखने का प्रयास किया।
कार्यक्रम में डॉ.सत्या पांडेय ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। स्वर संस्था की अध्यक्ष अर्पिता उपाध्याय ने बताया की आज के तनाव भरी दौड़ में महिलाएं घरों से निकलकर समाज के लिए भी कुछ करना चाहती हैं। हमारी संस्था इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन प्रतिवर्ष करती है। इसके अलावा हमारी संस्था सामाजिक जागरूकता, अंधविश्वास, वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रमों का भी आयोजन करती हैं। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए हम लोग रोजगार सृजन का प्रयास करते है।
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इस अवसर पर मीडिया प्रभारी माधुरी तिवारी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।उन्होंने बताया कि हमारा फाइनल कार्यक्रम गंगा रिजॉर्ट, तारामंडल में 13 अक्टूबर को प्रारंभ किया जाएगा। आप सभी का मैं धन्यवाद अर्पित करती हूं।
राजकुमार आर्य की रिपोर्ट:-
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