प्रत्येक माता पिता अपने संतानों हेतु मैकाले पद्धति से संचालित विद्यालय व गुरूकुलम् शिक्षा प्रणाली के विद्यालयों के शिक्षा के परिणामों का तुलनात्मक अध्ययन अवश्य करें।
- तथाकथित आधुनिक(पाश्चात्य) शिक्षा पद्धति के परिणाम:-
१. अत्याधिक धन का व्यय।
२. जिसके लिए माता पिता अत्याधिक अर्थ का संचय में समय नष्ट करते हैं।
३. पाश्चात्य दुर्गुणों का स्वाभाव में आना।
४. गन्दे दृश्य देखना,गन्दे गाने सुनना और गन्दे अभिनेताओं को अपना आदर्श मानना।
५. जीवन के मुख्य उद्देश्य को ना समझ पाना।
६. पूरी पढ़ाई करने के पश्चात भी मानसिक गुलामी का बने रहना।
७. देश समाज और राष्ट्र के हित को नहीं समझ पाना।
८.केवल अपने स्वार्थ का ही जीवन जीना।
१०. माता-पिता से दुर्व्यवहार करना।
११. चारित्रिक दोष बने रहना।
१२.शरीर में विभिन्न रोग होते रहते हैं।
१३.पूरी पढ़ाई के पश्चात ब्यूटी पार्लर,निचले दर्जे के कर्मचारी या निकृष्ट गृहस्थी बनते हैं।
१४.अनुशासन हीन दिनचर्या।
१५. केवल साक्षर ज्ञान तक ही सिमट जाता है जीवन।
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गुरुकुलम् शिक्षा प्रणाली के सुपरिणाम :-
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१. न्यूनतम धन का व्यय होना।
२. जिससे माता पिता को अधिक धन संचय करने का दबाव नहीं रहता।
३. भारतीय वैदिक संस्कृति से परिचित होता है।
४. सत्य सुनना सत्य बोलना और श्रेष्ठ लोगों को अपना आदर्श बनाना।
५.जीवन के मुख्य उद्देश्य को जान पाता है।
६.वैदिक राजधर्म की विधिवत पूरी पढ़ाई करने के पश्चात देश का नेतृत्व करने की क्षमता होती है।
७. देश समाज और राष्ट्र के हित को भलीभांति जान पाता है।
८.सार्वजनिक जीवन जीने के लिए सजग रहता है।
९.माता-पिता का सदैव सम्मान करता है ।
१०.विषय भोगों से दूर रहता है।
११.सदैव उन्नत चरित्र,स्वाभिमान और धार्मिकता का बने रहना।
१२.शरीर अधिक स्वस्थ निरोग रहता है।
१३.पढ़ाई के पश्चात श्रेष्ठ मनुष्य,उच्च शिक्षक,राज्य कर्मी आंग्ल में अधिकारी,वैद्य आंग्ल में डॉक्टर,आचार्य आंग्ल में प्रोफेसर,आदर्श कृषक,आदर्श गौपालक(गोपा),संगीतज्ञ एवं उत्तम गृहस्थाश्रम को धारण करते हैं।
१४.अनुशासित दिनचर्या।
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