भारत की लगाम न्यूज़ नई दिल्ली :- देश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा अधिसूचित नए नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही कानूनी लड़ाई जारी है। बुधवार को इस मामले में होने वाली सुनवाई टल गई और शीर्ष अदालत ने अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।
सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को निर्देश दिया है कि वह अपने द्वारा दाखिल हलफनामे (जवाब) की एक-एक प्रति सभी याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराए, ताकि वे उसका अध्ययन कर सकें और उसके बाद मामले की प्रभावी सुनवाई हो सके।
क्यों टली आज की सुनवाई?
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि केंद्र सरकार और UGC ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है, लेकिन उसकी प्रति अभी तक उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि बिना जवाब देखे वे अपना पक्ष पूरी तरह से नहीं रख सकते।
इस पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के तहत सभी पक्षों को एक-दूसरे के दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है। अदालत ने UGC को निर्देश दिया कि पहले अपना हलफनामा सभी याचिकाकर्ताओं को सौंपे, जिसके बाद मामले की सुनवाई की जाएगी। इसी कारण सुनवाई को चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया गया।
क्या है पूरा विवाद?
UGC ने 13 जनवरी 2026 को उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने तथा जातिगत भेदभाव, उत्पीड़न और असमान व्यवहार को रोकने के उद्देश्य से नए नियम अधिसूचित किए थे। आयोग का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य विश्वविद्यालय परिसरों में सभी विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए सुरक्षित एवं समावेशी वातावरण सुनिश्चित करना है।
हालांकि नियम लागू होते ही देश के विभिन्न शिक्षकों, छात्रों और सामाजिक संगठनों ने इसके कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएँ दायर कर इन नियमों को चुनौती दी गई।
नियम 3(C) पर क्यों मचा है बवाल?
याचिकाओं में सबसे अधिक आपत्ति UGC नियम 2026 के प्रावधान 3(C) पर जताई गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि यह प्रावधान मनमाना, अस्पष्ट और भेदभावपूर्ण है। उनका कहना है कि इसकी भाषा और दायरा ऐसा है जिससे निष्पक्ष कार्रवाई प्रभावित हो सकती है तथा कुछ मामलों में अधिकारों का हनन होने की आशंका है।
वहीं UGC का पक्ष है कि नए नियमों का उद्देश्य केवल उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव की घटनाओं को रोकना और शिकायतों के प्रभावी निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
पहले क्या हुआ था?
गौरतलब है कि इससे पहले हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी थी। साथ ही केंद्र सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से विस्तृत जवाब भी मांगा था। अब UGC का हलफनामा याचिकाकर्ताओं को सौंपे जाने के बाद अदालत मामले की अगली सुनवाई करेगी।
फिलहाल देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लागू किए जाने वाले इन नियमों का भविष्य सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा। सभी की निगाहें अब चार सप्ताह बाद होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
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