सीएम बोले, एम्स के लिए लड़नी पड़ी लंबी लड़ाई पांच करोड़ को प्रत्यक्ष व सात करोड़ को अप्रत्यक्ष रूप में मिल रहा लाभ
भारत कि लगाम गोरखपुरः- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की संकल्पना को साकार करने को समय की जरूरत बताई। कहा कि हमें समर्थ भारत बनाना होगा। समर्थ भारत के लिए स्वस्थ भारत बनाना होगा। स्वस्थ भारत के लिए हमें अपनी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना होगा। आज एम्स गोरखपुर की स्थापना से पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बिहार और नेपाल की पांच करोड़ की आबादी को प्रत्यक्ष और सात करोड़ की आबादी को अप्रत्यक्ष रूप में स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल रहा है।
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एम्स की दीक्षा समारोह में मुख्यमंत्री ने एम्स के लिए किए गए आंदोलन को याद किया। कहा कि एम्स गोरखपुर आज वटवृक्ष का रूप ले रहा है। बीज से वटवृक्ष बनने की एम्स की पूरी यात्रा में में एकमात्र व्यक्ति हूं जो इस समय यहां के दीक्षा समारोह के मंच पर उपस्थित हूं। एम्स के लिए हुए संघर्ष को नजदीक से देखा है। सड़क से संसद तक की लड़ाई लड़ी है। संघर्ष के प्रतिफल में वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इसकी आधारशिला रखी गई। पर, इसे बनाने के लिए जमीन की दिक्कत हो रही थी। संयोग से वर्ष 2017 में मैं ही प्रदेश का मुख्यमंत्री बन गया।
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सबसे पहले एम्स गोरखपुर के लिए जमीन ट्रांसफर कराया। जमीन मिली तो एम्स बनकर तैयार हुआ और वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री ने इसका लोकार्पण किया। एम्स गोरखपुर से अपने आत्मीय लगाव का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2019 में जब एम्स में एमबीबीएस के पहले बैच ने प्रवेश लिया तो विद्यार्थियों से संवाद करने में खुद आया था। एम्स गोरखपुर से पहले पटना से लखनऊ के बीच सिर्फ बीएचयू ही स्वास्थ्य सेवा के लिए यड़ा केंद्र था। एम्स गोरखपुर के रूप में सपनों का साकार होना आज सबके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षण है।
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इंसेफ्लाइटिस को केस स्टडी बनाएं: मुख्यमंत्री ने एम्स में पढ़ाई पूरी करने वाले डाक्टरों का आह्वान किया कि वह इंसेफ्लाइटिस को केस स्टडी बनाएं। उन्होंने इंसेफ्लाइटिस से बच्चों की मृत्यु के दौर को याद करते हुए कहा कि वर्तमान में एम्स की डीन एकेडमिक्स प्रो. महिला मित्तल उस समय बीआरडी मेडिकल कालेज में थीं। उनके अनुभव का भी लाभ लिया जा सकता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए इंसेफ्लाइटिस दहशत का पर्याय था। आज हम इसका उन्मूलन कर चुके हैं।
कहा कि जुलाई-अगस्त के महीने में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज की तीसरी मंजिल के वार्ड में विना पंखे के एक बेड पर चार-चार रोगी रहते थे। हर रोगी के साथ कई स्वजन रहते थे। वर्ष 2014 से पीएम मोदी के मार्गदर्शन में उपचार शुरू हुआ। उन्होंने पूर्वी उत्तर प्रदेश को दो महत्वपूर्ण केंद्र दिए। पहला बीआरडी मेडिकल कालेज परिसर में रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर और दूसरा एम्स। नए डाक्टर इस पर केस स्टडी करें कि इंसेफ्लाइटिस का उन्मूलन कैसे हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाला समय शोध का है। जितना अधिक रोगी देखेंगे, उनकी सामाजिक, भौगोलिक परिस्थितियों को जानेंगे, उतना अच्छा शोध कर सकेंगे। नए डाक्टरों ने अभी क्लास में पढ़ाई की है अब नए सिरे से कार्य करने की जरूरत होगी क्योंकि जीवन संग्राम अब शुरू हो रहा है। चुनौतियों के अनुरूप खुद को तैयार करना होगा और इसके लिए विस्तृत क्षेत्र में दुनिया आपके सामन है
आदिकाल से प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र है गोरखपुर
गोरक्ष धरा पर राष्ट्रपति द्रोपदी मुमु का अभिनंदन करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गोरखपुर भारत की सनातन परंपरा में आदिकाल से एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विख्यात रहा है। शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ ने सैकड़ों वर्ष पूर्व जिस धरा को अपनी साधना से आलोकित किया। उसे आज सभी लोग गोरखपुर के नाम से जानते हैं। गोरखपुर की आध्यात्मिक ऊर्जा प्राचीनकाल से देश और दुनिया में प्रकाश बिखेरती रही है। देश के जो भी प्रमुख बौद्ध तीर्थस्थल है, वे गोरखपुर के इर्द-गिर्द हैं। महात्मा बुद्ध की महानिर्वाण स्थली कुशीनगर गोरखपुर से 50 किमी, उनकी जन्मस्थली लुम्बिनी 90 किमी की दूरी पर है। जैन परंपरा के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी की पावनगरी गोरखपुर से 70 किमी और संतकबीर की महापरिनिर्वाण स्थली 30 किमी की ही दूरी पर है। गोरखपुर से भारत की सनातन परंपरा के केंद्र अयोध्या जाने में डेढ़ घंटे और बाबा विश्वनाथ के धाम काशी जाने में सिर्फ ढाई घंटे लगते है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन परंपरा और आध्यात्मिकता से संपन्न इस धरा की आजादी की लड़ाई में भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। पर, इन सबके बावजूद यह क्षेत्र शैक्षिक, स्वास्थ्य और आर्थिक विपन्नता का शिकार था। इस विपन्नता को वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में दूर किया गया।








