अटूट सनातन युवा महासभा रजि० ने माता शबरी को किया नमन

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भक्ति जाति और समाज के बंधनों से मुक्त होती है, यह केवल हृदय की शुद्धता और प्रेम की गहराई पर आधारित होती है।

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माता शबरी भगवान श्रीराम की अनन्य भक्त थीं। उन्होंने अपने गुरु मतंग ऋषि की आज्ञा से श्रीराम के दर्शन की प्रतीक्षा में वर्षों तक सेवा और भक्ति की।


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जब श्रीराम शबरी के आश्रम आए, तो उन्होंने प्रेमपूर्वक श्रीराम को मीठे बेर अर्पित किए, जिन्हें उन्होंने पहले चखकर यह सुनिश्चित किया कि वे मीठे हैं। उनकी निष्कपट भक्ति और प्रेम से श्रीराम अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने शबरी को आशीर्वाद दिया। शबरी की कथा भक्ति की सच्ची शक्ति को दर्शाती है, जो जाति, समाज और बाहरी आडंबरों से परे केवल प्रेम और श्रद्धा पर आधारित होती है।
शबरी जयंती की ढेर सारी शुभकामनाएं।

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