रिफ्यूजी कैंप में जन्मा लड़का इस्माइल हानिया कैसे बना हमास का टॉप लीडर ?
Bkl news network Mumbai: इस्माइल हानिया को हमास के टॉप लीडर रहे शेख अहमद यासीन का करीबी माना था. साल 1997 में हानिया को शेख अहमद यासीन का पर्सनल सेक्रेटरी बनाया गया.
ईरान में इस्माइल हानिया की हत्या कर दी गई है.
आतंकी संगठन हमास के टॉप लीडर और इसके पॉलिटिकल विंग के चीफ इस्माइल हानिया की ईरान में हत्या कर दी गई. हमास ने खुद एक बयान में इसकी पुष्टि की है. कहा कि इजरायली हमले में संगठन के पॉलिटिकल ब्यूरो चीफ और एक अन्य फिलिस्तीन अधिकारी की मौत हो गई. हालांकि अभी तक इजरायल की तरफ से हानिया की मौत पर कोई बयान नहीं आया है. सामरिक विशेषज्ञ इस्माइल हानिया की हत्या के पीछे इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद का हाथ मान रहे हैं. इजरायली एजेंसियां अक्टूबर 2023 में हुए हमले के बाद से ही हानिया को ढूंढ रही थीं. हमास के इस हमले में इजरायल के 1195नागरिकों की मौत हो गई थी.
कौन था इस्माइल हानिया? (Who was Ismail Haniyeh)
इस्माइल हानिया का जन्म साल 1962 में गाजा पट्टी के एक रिफ्यूजी कैंप में हुआ. उसकी शुरुआती-पढ़ाई लिखाई संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा संचालित एक स्कूल में हुई. इसके बाद साल 1981 में उसने अरबी लिटरेचर की पढ़ाई के लिए इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ़ गाजा में दाखिला ले लिया. यूनिवर्सिटी में ही हानिया ने एक इस्लामिक स्टूडेंट एसोसिएशन की स्थापना की, जो मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़ा हुआ था. यूनिवर्सिटी से निकलने के बाद साल 1988 में इस्माइल हानिया उन लोगों में शामिल था, जिन्होंने हमास की नींव रखी.
इस्माइल हानिया को हमास के टॉप लीडर रहे शेख अहमद यासीन का करीबी माना था. साल 1997 में हानिया को शेख अहमद यासीन का पर्सनल सेक्रेटरी बनाया गया. इसके बाद वह लगातार आगे बढ़ता गया. सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस्माइल हानिया लंबे समय से इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद का प्राइम टारगेट था. साल 2003 में मोसाद ने इस्माइल हानिया और शेख अहमद यासीन को मारने की कोशिश की थी, लेकिन सफल नहीं हो पाए. उसके बाद से हानिया कभी-कभार ही सार्वजनिक तौर पर नजर आता था, लेकिन फिलिस्तीन में उसकी लोकप्रियता बढ़ती गई,
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कैसे बना फिलिस्तीन का PM
साल 2006 में जब हमाज ने फिलीस्तीन के चुनाव में बहुमत हासिल किया तो इस्माइल हानिया को प्रधानमंत्री बनाया गया. हालांकि हानिया के प्रधानमंत्री बनने का इजरायल और अमेरिका समेत दुनिया के तमाम देशों ने तीखा विरोध किया. फिलिस्तीन की फंडिंग रोक दी. कई महीने तक चले तनाव के बाद आखिरकार जून 2007 में राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने इस्माइल हानिया को बर्खास्त कर दिया और उसकी सरकार भंग कर दी. उसके बाद से स्माइल हानिया गाजा पट्टी के इलाके में हमास के पॉलिटिकल चीफ के तौर पर काम कर रहा था.
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हमास के पक्ष में गोलबंदी
हाल के सालों में इस्माइल हानिया इस्लामिक देशों में हमास के पक्ष में माहौल बनाने के लिए जोर-शोर से कोशिशें कर रहा था. साल 2019 में वह तुर्की और कतर गया. इसके बाद से कई बार ईरान की यात्रा भी की. इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड के नेता कासिम सुलेमानी की मौत के बाद भी वहां गया. 2022 में सीरिया के प्रेसिडेंट बसर अल असद से भी मुलाकात की. अफगानिस्तान में जब तालिबान को सत्ता मिली तो इस्माइल हानिया भी नेता अब्दुल गनी बारादर को बधाई देने वालों में शामिल थे,
अक्टूबर 2023 में जब हमास ने इजरायल पर हमला किया तो भीषण युद्ध छिड़ गया. इसके बाद जब कतर और इजिप्ट की मध्यस्थता में नेगोशिएशन शुरू हुई तो इस्माइल हानिया ही हमास की तरफ से बातचीत कर रहा था. अक्टूबर 2023 के बाद से एक तरीके से वह अंडरग्राउंड हो गया था. एक दिन पहले ही उसने ईरान के राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुआ था. Bkl news network
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