दिल्ली: आ गया इलेक्टोरल बॉन्ड पर अमित शाह का बयान, 1100 सौ का चंदा लेकर 100 रुपया पार्टी फण्ड मे जमा करते है विपक्षी सांसद

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इलेक्टोरल बॉन्ड पर अमित शाह का बयान, बोले- विपक्षी दलों को 14000 हजार करोड़ इलेक्टोरल बॉन्ड पर अमित शाह का बयान, बोले- विपक्षी दलों को 14000 करोड़ का चंदा, उनके सांसद भी हैं ?

सभी विपक्षी दल के नेता राजनीतिक चंदा नकद में लेते थे और 1100 रुपये के चंदे में से 100 रुपये पार्टी के नाम पर जमा करते तथा 1000 रुपये अपनी जेब में रखते थे। कांग्रेस पार्टी ने वर्षों तक इस प्रणाली को चलाया हैं कुल 20,000 करोड़ रुपये के चुनावी बॉण्ड में से भाजपा को लगभग 6,000 करोड़ रुपये मिले। बाकी बॉण्ड कहां गए? टीएमसी को 1,600 करोड़ रुपये मिले, कांग्रेस को 1,400 करोड़ रुपये मिले। बीआरएस को 1,200 करोड़ रुपये, बीजद को 750 करोड़ रुपये और द्रमुक को 639 करोड़ रुपये मिले।303 सांसद होने के बावजूद हमें 6,000 करोड़ रुपये मिले हैं और बाकियों को 242 सांसदों के बावजूद 14,000 करोड़ रुपये मिले हैं। किस बात को लेकर इतना हंगामा क्यों केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनावी बॉण्ड पर उच्चतम न्यायालय के आदेश के प्रति सम्मान प्रदर्शित करते हुए कहा कि यह योजना राजनीति में काले धन को खत्म करने के लिए शुरू की गई थी और इसे रद्द करने के बजाय इसमें सुधार किया जाना चाहिए था।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अवधारणा है और जब यह लागू होगा, तो यह तेजी से विकास सुनिश्चित करेगा और बार-बार होने वाले खर्च को समाप्त करेगा।भारतीय राजनीति में काले धन के प्रभाव को खत्म करने के लिए चुनावी बॉण्ड लाए गए। उच्चतम न्यायालय का फैसला सभी को मानना होगा। मैं उच्चतम न्यायालय के फैसले का पूरा सम्मान करता हूं, लेकिन मुझे लगता है कि चुनावी बॉण्ड को पूरी तरह खत्म करने की बजाय इसमें सुधार किया जाना चाहिए था।

एक राष्ट्र, एक चुनाव के प्रस्ताव का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि देश भर में कई बार चुनाव होने के कारण इसमें बड़ी मात्रा में धन खर्च होता है। उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण सरकार की निर्णय लेने की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और विकास कार्य रुक जाते है
विपक्षी दल के नेता राजनीतिक चंदा नकद में लेते थे और 1100 रुपये के चंदे में से 100 रुपये पार्टी के नाम पर जमा करते तथा 1000 रुपये अपनी जेब में रखते थे। कांग्रेस पार्टी ने वर्षों तक इस प्रणाली को चलाया है। कुल 20,000 करोड़ रुपये के चुनावी बॉण्ड में से भाजपा को लगभग 6,000 करोड़ रुपये मिले। बाकी बॉण्ड कहां गए?* टीएमसी को 1,600 करोड़ रुपये मिले, कांग्रेस को 1,400 करोड़ रुपये मिले। बीआरएस को 1,200 करोड़ रुपये, बीजद को 750 करोड़ रुपये और द्रमुक को 639 करोड़ रुपये मिले। 303 सांसद होने के बावजूद हमें 6,000 करोड़ रुपये मिले हैं और बाकियों को 242 सांसदों के बावजूद 14,000 करोड़ रुपये मिले हैं। किस बात को लेकर इतना हंगामा है?केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनावी बॉण्ड पर उच्चतम न्यायालय के आदेश के प्रति सम्मान प्रदर्शित करते हुए कहा कि यह योजना राजनीति में काले धन को खत्म करने के लिए शुरू की गई थी और इसे रद्द करने के बजाय इसमें सुधार किया जाना चाहिए था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अवधारणा है और जब यह लागू होगा, तो यह तेजी से विकास सुनिश्चित करेगा और बार-बार होने वाले खर्च को समाप्त करेगा।भारतीय राजनीति में काले धन के प्रभाव को खत्म करने के लिए चुनावी बॉण्ड लाए गए। उच्चतम न्यायालय का फैसला सभी को मानना होगा। मैं उच्चतम न्यायालय के फैसले का पूरा सम्मान करता हूं, लेकिन मुझे लगता है कि चुनावी बॉण्ड को पूरी तरह खत्म करने की बजाय इसमें सुधार किया जाना चाहिए था।एक राष्ट्र, एक चुनाव के प्रस्ताव का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि देश भर में कई बार चुनाव होने के कारण इसमें बड़ी मात्रा में धन खर्च होता है। उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण सरकार की निर्णय लेने की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और विकास कार्य रुक जाते है

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