मनुस्मृति के इस मंत्र का अर्थ जल्द ही पढ़-समझ ले, कहीं आपका कुल परिवार विनाश की ओर नही ना बढ़ रहा है

मनुस्मृति
मनुस्मृति

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शोचन्ति जामयो यत्र विनश्यत्याशु तत्कुलम्।

न शोचन्ति तु यत्रैता वर्धते तद्धि सर्वदा।।

मनु०३/५७

मनुस्मृति
मनुस्मृति

जिस कुल एवं परिवार में स्त्रियां अपने-अपने पुरुषों के वेश्यागमन, अत्याचार या व्यभिचार आदि दोषों से आये दिन शोकातुर रहती हैं ? हमेशा चिन्तित  रहती है ! वह कुल एवं परिवार शीघ्र विनाश को प्राप्त हो जाता है,

और जिस कुल में स्त्री लोग पुरुषों के उत्तम आचरणों से प्रसन्न रहती है, वह कुल सर्वदा बढ़ता तथा प्रगति करता रहता है।

अतः स्त्री आपके परिवार रुपी मन्दिर की सात्क्षात देवी है। उसे उदास और नाराज ज्यादा देर ना रहने दे। स्त्री को हमेशा प्रसन्न रखने का प्रयास करते रहे ?

क्यो कि यही मनुस्मृति एक मन्त्र मे यहा तक कहती है ? जहा स्त्री का मान सम्मान होता है वहा देवताओ का वास होता है

PRINC VIDYARTHI

 

 

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