पत्रकारों के कानूनी अधिकारों को लेकर बड़ी खबर: कवरेज में बाधा, धमकी और कैमरा तोड़ने पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई

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1 जुलाई 2024 से लागू भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अपराध की प्रकृति के अनुसार हो सकती है कार्रवाई, पत्रकारों से अपील—अपने अधिकारों के प्रति रहें जागरूक

भारत की लगाम न्यूज़ पत्रकारिता एवं कानून:-लोकतंत्र में पत्रकारिता को समाज का सजग प्रहरी माना जाता है। पत्रकार अपनी लेखनी, कैमरे और समाचारों के माध्यम से जनहित के मुद्दों को सामने लाने, भ्रष्टाचार उजागर करने तथा आम जनता की आवाज शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। ऐसे में पत्रकारों को समाचार संकलन के दौरान धमकाना, उनके साथ मारपीट करना, कैमरा छीनना या उपकरणों को नुकसान पहुंचाना गंभीर मामला हो सकता है, जिस पर परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

1 जुलाई 2024 से देश में भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) लागू है, जिसने भारतीय दंड संहिता (IPC) का स्थान लिया है। पत्रकारों के लिए यह आवश्यक है कि वे नए आपराधिक कानूनों की जानकारी रखें और किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में कानूनी प्रक्रिया का सहारा लें।

कवरेज में बाधा डालने पर क्या है कानून?

यदि कोई व्यक्ति पत्रकार को जबरन रोकता है, रास्ता अवरुद्ध करता है या उसे गलत तरीके से बंधक बनाता है, तो घटना की परिस्थितियों के अनुसार BNS की धारा 126 (सदोष अवरोध) और धारा 127 (सदोष परिरोध) प्रासंगिक हो सकती हैं। हालांकि, प्रत्येक मामले में इन धाराओं का लागू होना तथ्यों पर निर्भर करेगा।

कैमरा तोड़ने, उपकरण छीनने और रिकॉर्डिंग मिटाने पर कार्रवाई

समाचार संकलन के दौरान कैमरा, मोबाइल फोन, माइक या अन्य उपकरणों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाना संपत्ति को क्षति पहुंचाने से संबंधित अपराध बन सकता है। ऐसे मामलों में BNS की धारा 324 (रिष्टि) सहित अन्य प्रासंगिक प्रावधानों पर विचार किया जा सकता है। उपकरण छीनने या ले जाने की घटना में तथ्यों के आधार पर चोरी अथवा अन्य संबंधित अपराध भी बन सकते हैं।

रिकॉर्ड की गई सामग्री को जबरन हटाने या डिजिटल सामग्री के साथ छेड़छाड़ के मामलों में भी कानूनी प्रावधानों की जांच जरूरी है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराएं 66E और 67 हर प्रकार की रिकॉर्डिंग मिटाने पर स्वतः लागू नहीं होतीं; इनका संबंध विशिष्ट कानूनी परिस्थितियों से है।

गाली-गलौज, धमकी और मारपीट को न करें नजरअंदाज

यदि किसी पत्रकार को खबर प्रकाशित न करने के लिए धमकाया जाता है, डराया जाता है या शारीरिक चोट पहुंचाई जाती है, तो घटना के स्वरूप के अनुसार BNS की धारा 351 (आपराधिक धमकी), धारा 352 (जानबूझकर अपमान), धारा 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) तथा गंभीर चोट के मामलों में धारा 117 सहित संबंधित प्रावधान लागू हो सकते हैं।

इसी प्रकार, खबर रोकने के लिए अवैध रूप से धन की मांग या दबाव डालने की घटना में जबरन वसूली से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जांच की जा सकती है।

पत्रकारों को क्या करना चाहिए?

किसी घटना के दौरान पत्रकार अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें। जहां संभव हो, घटना से संबंधित वीडियो, फोटो, गवाहों के विवरण और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखें। पुलिस के समक्ष लिखित शिकायत देकर घटना का पूरा विवरण दर्ज कराएं और शिकायत की प्राप्ति या संदर्भ संख्या अवश्य लें। यदि शिकायत पर कार्रवाई नहीं होती है, तो उपलब्ध कानूनी प्रक्रिया के तहत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों या सक्षम न्यायालय से संपर्क किया जा सकता है।

यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि पत्रकार होने मात्र से प्रत्येक स्थान पर प्रवेश करने या बिना किसी वैधानिक प्रतिबंध के रिकॉर्डिंग करने का असीमित अधिकार नहीं मिल जाता। सार्वजनिक और निजी परिसरों के नियम, सुरक्षा संबंधी प्रतिबंध तथा अन्य लागू कानून भी महत्वपूर्ण हैं।

पत्रकार एकता और जागरूकता का संदेश

पत्रकारिता की स्वतंत्रता लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। पत्रकारों के साथ किसी भी प्रकार की हिंसा, अनुचित धमकी या गैरकानूनी हस्तक्षेप की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं, पत्रकारों को भी अपने कानूनी अधिकारों और जिम्मेदारियों की सही जानकारी रखनी चाहिए, ताकि वे निर्भीकता, निष्पक्षता और जिम्मेदारी के साथ जनहित में अपना दायित्व निभा सकें।

अपील: सभी पत्रकार साथी इस महत्वपूर्ण जानकारी को साझा करें, लेकिन किसी भी घटना में कानूनी धाराएं लगाने से पहले तथ्यों और संबंधित कानून की पुष्टि अवश्य करें।

पत्रकारिता का सम्मान करें, कानून का पालन करें और लोकतंत्र की आवाज को मजबूत बनाएं।

नोट: यह सामान्य जन-जागरूकता संबंधी समाचार सामग्री है, व्यक्तिगत कानूनी सलाह नहीं। अंतिम रूप से कौन-सी धाराएं लागू होंगी, यह घटना के तथ्यों और जांच पर निर्भर करेगा।

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