अधिवक्ता अश्विनी कुमार शर्मा एवं अधिवक्ता आकाश कुमार शर्मा ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में ट्रांसजेंडर अधिकारों के लिए ऐतिहासिक जीत हासिल की
प्रयागराज: ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों को मजबूती प्रदान करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने शरद रोशन सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (रिट याचिका संख्या 35406 of 2025) में अधिवक्ता अश्विनी कुमार शर्मा एवं आकाश कुमार शर्मा द्वारा प्रस्तुत याचिका पर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया।
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माननीय न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की खंडपीठ ने बरेली के माध्यमिक शिक्षा परिषद के क्षेत्रीय सचिव के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता के शैक्षणिक दस्तावेजों में नाम एवं लिंग में सुधार के आवेदन को खारिज कर दिया गया था। न्यायालय ने माना कि अधिकारी ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 और उसके वर्ष 2020 के नियमों के प्रावधानों को लागू करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं।

संबंधित विबादियों को आदेश दिया गया है कि वे आज की तारीख से आठ सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता के शैक्षणिक दस्तावेजों में आवश्यक परिवर्तन करते हुए नई अंकतालिकाएं एवं प्रमाणपत्र जारी करें।
यह निर्णय ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की पहचान और गरिमा के मौलिक अधिकार की एक सशक्त पुष्टि है, जो यह सुनिश्चित करता है कि संविधान के तहत समानता का वादा एक ठोस वास्तविकता में बदले।
यह निर्णय ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की पहचान और गरिमा के मौलिक अधिकार की एक सशक्त पुष्टि है, जो यह सुनिश्चित करता है कि संविधान के तहत समानता का वादा एक ठोस वास्तविकता में बदले।
–अधिवक्ता अश्विनी कुमार शर्मा
यह निर्णय ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के उस अधिकार को मजबूत करता है जिसके तहत उनकी पहचान सभी आधिकारिक दस्तावेजों में सही ढंग से दर्ज की जाए, जिससे संविधान द्वारा गारंटीकृत गरिमा, समानता और गैर-भेदभाव सुनिश्चित हो सके।
-अधिवक्ता आकाश कुमार शर्मा
(याचिकाकर्ता के अधिवक्ता)
– अधिवक्ता अश्विनी कुमार शर्मा एवं अधिवक्ता आकाश कुमार शर्मा
(याचिकाकर्ताके अधिवक्ता)
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