वेदों के सम्बन्ध में एक सामान्य परिचय
१. वेद चार हैं। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। मोक्ष की प्राप्ति के लिए जिन चार साधनों की आवश्यकता है, वे इन चारो वेदों में बताये गए हैं, अर्थात् ज्ञान, कर्म, उपासना और विज्ञान। चारो वेदों में लगभग बीस हज़ार चार सौ मंत्र और लगभग सात लाख अड़सठ हज़ार शब्द हैं।
२. ऋग्वेद सबसे बड़ा है। इसमें दस मंडल हैं और इन मंडलों में १०२८ सूक्त हैं, जिनमें १०५५२ ऋचाए हैं। यजुर्वेद में ४० अध्याय और १९७६ मंत्र हैं। सामवेद में १८७५ साम मंत्र हैं और अथर्ववेद में २० कांड है, जिनमें ७६० सूक्त और ५९७७ मंत्र, लगभग ६००० ऋचाए हैं।
३. वेदों का ज्ञान ईश्वर ने सृष्टि के आरम्भ में चार ऋषियों को दिया। अर्थात् देखें शतपतब्राह्मण ११/४/२/३/ और अथर्ववेद १०/७/२० अग्नि ऋषि को ऋग्वेद, वायु को यजुर्वेद, आदित्य को सामवेद और अंगिरा को अथर्ववेद।
४. इन ऋषियों ने वेदों का अन्य ऋषियों और मनुष्यों को उपदेश दिया। संसार भर की सब विद्याएं वेदों से ही निकली हैं।
५. वेद स्वत: प्रमाण है। परन्तु अन्य पुस्तकें परत: प्रमाण, अर्थात् जो बात उनमें वेद के अनुकूल है, वह ठीक है, और जो वेद-विरुद्ध है, वह ठीक नहीं।
६. वेद लौकिक संस्कृत भाषा में नहीं है किन्तु देववाणी में है। संस्कृत भाषा वेदों की भाषा से निकली है और अन्य सब भाषाए संस्कृत से।
७. वेदों में इतिहास नहीं है। वेदों में यौगिक शब्द है, रूढ़ नहीं। अर्थात् वेदों में ऐसे शब्द आए हैं, जो हमको मनुष्यों के नामों जैसे ज्ञात होते हैं परन्तु उनके गुणवाचक अर्थ हैं, व्यक्तिवाचक नहीं।
८. वेदों में मुख्य राम, कृष्ण आदि कल्पित अवतारों का वर्णन नहीं है।
९. वेदों में मुख्य तीन बातें हैं- शाश्वत सत्य, नित्य ईश्वरोपासना से मनुष्य की उन्नति और सृष्टि के नियम।
१०. वेदों में इन्द्र, अग्नि, वरुण, आदि शब्द कहीं ईश्वर के लिए आए हैं और कहीं भौतिक पदार्थों; जैसे- आग, पानी, आदि के लिए। इसका पता प्रकरण से ज्ञात होता है।
११. पहले संसार-भर में वैदिक धर्म ही था। पीछे भिन्न-भिन्न मत हो गए।
वेदों के विषय में अदभुत जानकारी के लिए पढ़िए
“वेदों को जानें” पुस्तक
लेखक #डॉ_विवेक_आर्य








