आध्यात्म: जैसे “कार” जड़ वस्तु है, इसे ड्राइवर संचालित करता है, वैसे “मन” भी जड़ पदार्थ है, इसे आत्मा संचालित करती है, पढे इस आध्यात्मिक चर्चा को…?

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

यदि कोई व्यक्ति कार चला रहा हो, और कार उसके नियंत्रण से बाहर हो जाए, तो आप सोचिए, उसकी क्या स्थिति होगी? “बहुत खराब। वह बुरी तरह से घबरा जाएगा, और दुर्घटना हो जाएगी।

जैसी कार की स्थिति है, ऐसी ही स्थिति मन की भी है।

जैसे कार एक जड़ पदार्थ है। ऐसे ही मन भी जड़ पदार्थ है।

कार स्वयं नहीं चलती, मन में भी विचार स्वयं नहीं आते। कार को चेतन ड्राइवर चलाता है। मन को भी चेतन आत्मा चलाता है, अर्थात मन में विचार उत्पन्न करता है।”
अब जैसे यदि कार ड्राइवर यह अनुभव करे, कि “कार मेरे नियंत्रण में नहीं है, तो उसकी हालत खराब हो जाती है। इसी प्रकार से जब व्यक्ति यह अनुभव करता है, कि “मेरा मन मेरे नियंत्रण में नहीं है,” तो सोचिए क्या उसकी स्थिति खराब नहीं होगी? बिल्कुल होगी।” कुछ सच्चे वैराग्यवान लोगों को छोड़कर, आजकल लगभग सभी की स्थिति ऐसी ही है।
यह कितनी आश्चर्यजनक एवं कष्टदायक स्थिति है, कि अधिकांश लोग ऐसा अनुभव करते हैं, कि “मन मेरा है, और फिर भी मेरे नियंत्रण में नहीं है।” इस कारण से वे संसार भर के पाप करते हैं। “यदि मन अधिकार में आ जाए, तो फिर कोई व्यक्ति किसी पाप को नहीं करेगा।”

जैसे- एक व्यक्ति कहता है, कि “मैं शराब पीना चाहता तो नहीं हूं, परन्तु मेरा मन नहीं मानता, इसलिए शराब पी ही लेता हूं।” दूसरा व्यक्ति कहता है, “मेरा मन भी नहीं मानता, मन के दबाव में आकर मैं जुआ खेल ही लेता हूं।” ऐसे ही कम या अधिक सबकी स्थिति है। कोई किसी पाप में फंसा हुआ है, और कोई किसी पाप में। सारा संसार इस बात से परेशान है। “न चाहते हुए भी बहुत से पाप कर्म करता जा रहा है, और जितने जितने पाप करता जा रहा है, उतने उतने दंड भी भोग रहा है।”

“जैसे कार जड़ पदार्थ है। इसको चलाना सीखकर और उसका कुछ अभ्यास कर के कार नियंत्रण में आ जाती है, और ड्राइवर की समस्या हल हो जाती है।” ऐसे ही “मेरा मन भी जड़ वस्तु है। यदि मैं अपने मन को भी चलाना सीख लूं, और इसे चलाने का कुछ अभ्यास भी कर लूं, तो यह भी कार की तरह मेरे नियंत्रण में आ जाएगा। तब मेरी मन वाली समस्या भी हल हो जाएगी।”

यदि आप भी ऐसा करेंगे, तो आपकी मन की समस्या भी हल हो जाएगी और आप सुख शांति से जी पाएंगे।

 “स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात।”

  • आप निचे घंटी पर क्लिक कीजिए और allow कर के नोटीफिकेशन ऑन कर दिजीए ना..?

Leave a Comment