भारत की लगाम न्यूज़ मथुरा:- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संतों की उपस्थिति में सनातन समाज से एकजुट होने का आह्वान किया। रामनगरी का उदाहरण देते हुए सीएम ने कहा कि वर्ष 2017 के पहले अयोध्या में तीन घंटे बिजली मिलती थी। जय श्रीराम बोलने पर लड्डू नहीं, डंडे-लाठियां मिलती थीं गलियां संकरी थीं और भवन जर्जर। आवागमन के साधन भी सीमित थे, लेकिन आज अयोध्या त्रेतायुग का स्मरण कराती है। पूज्य संत एक मंच पर आए, एक स्वर में बोले तो 500 वर्ष का कलंक मिट गया और अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण हो गया। संतों की एकता में इतनी शक्ति है कि सभी सनातनी एकजुट होकर ताकत का अहसास कराना प्रारंभ कर दें तो कोई भी विधर्मी और विधर्मी की आड़ में उनकी जूठन खाकर हिंदू विरोधी षड्यंत्र करने वाले भारत का बाल बांका भी नहीं कर पाएंगे।
मुख्यमंत्री मंगलवार को संत श्रीमद् जगद्गुरु द्वाराचार्य श्री मलूकदास जी महाराज की 452वीं जयंती पर आयोजित श्री सीताराम निकुंज अष्टयाम लीला महोत्सव कार्यक्रम में बोल रहे थे। इसके पहले उन्होंने वृंदावन में श्रीमलूकपीठ आश्रम में दर्शन-पूजन और गोपूजन किया।
सीएम योगी ने कहा कि बिना रुके, थके, डिगे, झुके इस यात्रा को चरैवेति-चरैवेति के संकल्प के साथ निरंतर बढ़ाना होगा। व्यक्तिगत स्वार्थ राष्ट्र और सनातन धर्म के मार्ग में बाधा नहीं बनना चाहिए। मेरा हित सनातन व देशहित से बड़ा नहीं हो सकता।
पूज्य संतों ने जब व्यक्तिगत, आश्रम, संप्रदाय व पंथ हित को एक तरफ रखकर सनातन हित के बारे में सोचना प्रारंभ किया, तब यह व्यापक जागृति, दिव्य तेज, चमत्कार देखने को मिला। कई पीढ़ियां चली गई, लेकिन राम मंदिर का दर्शन नहीं कर पाईं। हमारी पीढ़ी सौभाग्यशाली है, जो अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन, जन्मभूमि की मुक्ति, श्रीराम मंदिर निर्माण और फिर भव्य प्राण-प्रतिष्ठा की साक्षी बनी। 1528 में राम मंदिर को बाबर के सिपहसालार मीर बाकी ने
तोड़ा था। 500 वर्ष पूरे भी नहीं हुए और हमने भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण कराया। यही भारत का
गौरव है और यह तब होता है, जब संतों का आशीर्वाद और सशक्त नेतृत्व होता है।
कृष्ण-कन्हैया व राधारानी के दिव्य तेज से आलोकित है ब्रजभूमि
सीएम ने कहा कि ब्रजभूमि कृष्ण कन्हैया व राधारानी के दिव्य तेज से आलोकित है। हर सनातन धर्मावलंबी यहां के रज-रज में श्रीकृष्ण कन्हैया व राधा रानी का दर्शन करता है। यहां के दिव्य तीर्थ मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना, गोकुल, नंदगांव, बलदेव हमें प्रेरणा प्रदान करते हैं। डबल इंजन सरकार ब्रज तीर्थ विकास परिषद का गठन कर संतों के मार्गदर्शन में यहां की परंपरा व विरासत के संरक्षण व उन्नयन का प्रयास कर रही है।
माघ मेला, कुम्भ, महाकुम्भ की धरती है प्रयागराजः सीएम योगी ने कहा कि संत जगद्गुरु मलूकदास जी महाराज ने वैष्णव परंपरा की अलख जगाने का दायित्व अपने हाथ में लिया। प्रयागराज जगद्गुरु रामानंदाचार्य की भी जन्मभूमि है। यह माघ मेला, कुंभ, महाकुंभ की धरती है।
1916 में राष्ट्रपिता ने देखी थी काशी की दुर्दशा
सीएम ने कहा कि पीएम मोदी के मार्गदर्शन में काशी विश्वनाथ धाम दिव्य बन गया है। 1916 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी काशी हिंदू विश्वविद्यालय के उद्द्घाटन कार्यक्रम में आए थे तो उनके मन में काशी की महिमा का दर्शन करने का भाव आया। तब उन्होंने यहां की दुर्दशा का जिक्र किया। सीएम ने कहा कि 2017 में मुख्यमंत्री बनने पर जब मैं काशी गया तो उस समय भी एक साथ 50 लोग दर्शन नहीं कर सकते थे। गली संकरी थी, लेकिन आज एक साथ 50 हजार श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकते हैं।
हमारी सरकार ने संभल को संभाला
मुख्यमंत्री ने कहा कि संभल में 1526 में श्रीहरिहर मंदिर को बाबर की औलादों ने तोड़ा था। वहां 67 तीर्थ, 19 कूप थे, सब कुछ मिट गया था। 1976-78 में दंगे हुए. सैकड़ों हिंदुओं को मार दिया गया। 1995-96 में सपा सरकार में दरिंदों के मुकदमे वापस कर दिए गए। मुझे उस परिवार का एक सदस्य मिला। उसने बताया कि हमारी प्रॉपर्टी को लूट लिया गया। हम दिल्ली भागकर जान बचा रहे हैं। तब मैंने उनसे कहा कि कागज लेकर आओ, आपकी प्रॉपर्टी पर फिर से कब्जा कराएंगे। प्रशासन से कहा कि टू-लेन सड़क, सराय, धर्मशाला बनाओ और यात्रा प्रारंभ कराओ। 67 तीथों व 19 कूपों से कब्जे हटवाए।





