????️????ओ३म् सादर नमस्ते जी ????????️
???????? आपका दिन शुभ हो ????????
दिनांक – – १५ अगस्त २०२४ ईस्वी ( भारतीय स्वतंत्रता दिवस )
दिन – – गुरुवार
???? तिथि — दशमी ( १०:२६ तक तत्पश्चात एकादशी )
???? नक्षत्र – – ज्येष्ठा ( १२:५३ तक तत्पश्चात मूल )
पक्ष – – शुक्ल
मास – – श्रावण
ऋतु – – वर्षा
सूर्य – – दक्षिणायन
???? सूर्योदय – – प्रातः ५:५० पर दिल्ली में
???? सूर्यास्त – – सायं १९:०० पर
???? चन्द्रोदय — १५:३३ पर
???? चन्द्रास्त – – २५:३९ पर
सृष्टि संवत् – – १,९६,०८,५३,१२५
कलयुगाब्द – – ५१२५
विक्रम संवत् – -२०८१
शक संवत् – – १९४६
दयानंदाब्द – – २००
????????????????????????????????
???????? आप सभी देशवासियों को साहस और शौर्य के प्रतीक राष्ट्रीय पर्व १५ अगस्त स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
==============
???????? आज स्वतंत्रता दिवस है। हमारी आजादी का पावन पर्व। एक ऐसा राष्ट्रीय पर्व जो हमें सदैव गौरवान्वित करता है। जिस पर्व पर हमारे राष्ट्रीय ध्वज को फहराते देखकर हमारा मन हर्षित हो उठता है।
???????? इस वर्ष हम स्वतंत्रता की ७८ वीं वर्षी मनाने जा रहे हैं। यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है।
???????? कभी सोने की चिडिया और आर्यवर्त कहलाने वाला हमारा आर्यावर्त अतीत में एक समग्र और समृद्ध राष्ट्र था। शिक्षा और ज्ञान का दिव्य और पवित्र मंदिर था। जहाँ पर हजारों विदेशी भी अध्ययन के लिए आते थे। ऐसे समग्र और विकसित देश पर कुछ बाहरी लोंगों की काली नजरे पडी। इनमें तुर्क, मंगोल, हुण, मुगल, अंग्रेज, फ्रांसीसी,पुर्तगाली इत्यादि भी सम्मिलित थे। इन सभी ने अलग अलग समय पर अपनी महत्वाकांक्षा के बल पर कभी व्यापार, कभी राजनीतिक संबंध, कभी वैवाहिक संबंध, कभी दोस्ती के नाम पर छल और कपट से अपनी जडे़ भारत में जमाकर यहां के शासक बन बैठे। इनकी महत्वाकांक्षा और जरुरतों को पुरी करते करते हमारा राष्ट्र सैकडो़ वर्षों तक इनका गुलाम बना रहा।
???????? एक ओर गुलामी की बेडिया थी तो वही दूसरी ओर राष्ट्रवाद और आजादी के मतवाले भी इस पुण्य भौम से अपने लगाव के कारण अपने अंदर सुलगते अंगारों को अब धरातलीय स्वरुप में आजादी की जंग में आहुति देना चाहते थे। आजादी के यही वीर योद्धा कभी राणा प्रताप, कभी शिवा सरदार, कभी लाल बाल पाल, कभी सुभाषचंद्र, कभी वीर सावरकर, कभी चंद्रशेखर, कभी अशफाक, कभी भगत सिंह, कभी झांसी की रानी, कभी खुदीराम इत्यादि के रूप में इस धन्य धरा पर अवतरित हुए और सैकड़ों वर्षों तक इन बाहरी ताकतों से उलझते हुए १५ अगस्त १९४७ को हमारे भारतवर्ष को आजाद करा के ही दम लिया।
???????? आजादी की यह सुनहरी भोर कही अंधियारी रातों के बाद आई थी। यह वह जलता दीपक था। जो कही बार बुझ जाने के पश्चात भी अपने अंजाम को पूरा करने में तत्पर था। यही वह पवित्र पल था। जब आजादी के कही दिवाने हंसते हंसते मौत को गले लगाने के बाद भी स्वर्ग से अपने सपने को साकार होते देख रहे थे। यही वह आनंदित पल था। जब भारत माता भी अपनी आजादी पर अपने आंसू नही रोक पाई थी। यही वह गौरवशाली क्षण था जब हम विश्व को छाती ठोकर कर अपनी आजादी का आभास करा रहे थे। यही वह सुनहरा समय था जब कही देशभक्तों की कुर्बानी आज साकार हुई।
यही वह पल था जब प्रचंड वाणी में आकाशवाणी गुंज रही थी-
????????”सर फरोश की तमन्ना हैं, देखना है जोर कितना”
????????”तुम मुझे खुन दो, मै तुम्हें आजादी दूँगा”
????????”वंदे मातरम्, वंदे मातरम्। ”
“भारत माता की जय! ”
???????? सैकड़ों वर्षों की इस गुलामी के बाद १५ अगस्त की स्वतंत्रता हमारे नये सपनों, नये अरमानों, नव भारत, विकसित भारत और सामाजिक समरसता की अनुभूति लेकर आया था। नई सोच और नई पीढ़ी से फिर समृद्ध भारत की अभिलाषा थी। लेकिन आजादी के ७८ वर्ष बाद भी आज हमारा देश इस्लामिक आतंकवाद, जनसंख्या विस्फोट, घुसपैठिया बेरोजगारी, गरीबी, वर्गवाद, जातिवाद, शिक्षा, चिकित्सा, खाद्यान्न, जल, आवास, और अपने मूल स्वरुप के लिए जूझ रहा है। ऐसी ढेरों समस्याऐं आज हमारे मन और घरों में प्रवेश कर चुकी हैं। हालिया वर्षों में हमारे पडो़सी राष्ट्र चीन, पाकिस्तान हमारे सरजमीन पर फिर से बुरी नजरे लगाए बैठे हैं। वही चाइना वस्तुऐं हमारी देश की अर्थव्यवस्था की धुरी स्वदेशी वस्तुओं पर भारी पड़ रही हैं। ऐसे हालात हमें और विकराल हालात में ले जा सकते हैं।
???????? आइऐ! स्वतंत्रता दिवस के इस पावन पर्व पर हम सब राष्ट्रवाद की ओर फिर से अग्रसर होकर नये संकल्प, नये दृढ़ निश्चिय विश्वासों के साथ विकसित भारत का संकल्प ले। तिरंगे को अपनी आन बान और शान समझे। स्वदेशी वस्तुओं को अपनाऐ। चाइना वस्तुओं का बहिष्कार करे। स्वदेश से अथक प्रेम करे। जाति, धर्म और भाषा का भेद मिटाए। हमारे राष्ट्र की ओर उठने वाली प्रत्येक आंख को कुचल डाले।
????????????????????????????????????????????????????????????????
????????????????????????????????????
????️????आज का वेद मंत्र ????️????
???? ओ३म् भद्रं कर्णेभि:श्रृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्रा:।स्थिरैरड्गैस्तुष्टुवां सस्तनूभिर्व्यशेमहि देवहितं यदायु:( यजुर्वेद १५\२१ )
???? हे दिव्य गुणयुक्त सृष्टिकर्ता देवेश्वर! आप की कृपा से कानों द्वारा हम सदैव भद्र- कल्याण को ही सुनें, अकल्याण की बात भी हम कभी न सुने।हे यज्ञनीश्वर! ।हम आखों से सदा शुभ देखें। हे जगदीश! हमारे सब अंग उपागं सदा दृढ़ और स्थिर बनें रहे जिससे हम लोग स्थिरता से आपकी स्तुति करते हुए सदा आपकी आज्ञा का पालन करते रहे ।
????????????????????????????????????????????????????????????????
????विश्व के एकमात्र वैदिक पञ्चाङ्ग के अनुसार????
==============
???? ????????आज का संकल्प पाठ ????????????
(सृष्ट्यादिसंवत्-संवत्सर-अयन-ऋतु-मास-तिथि -नक्षत्र-लग्न-मुहूर्त) ???????????????? ????
ओ३म् तत्सत् श्रीब्रह्मणो द्वितीये प्रहरार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे 【एकवृन्द-षण्णवतिकोटि-अष्टलक्ष-त्रिपञ्चाशत्सहस्र- पञ्चर्विंशत्युत्तरशततमे ( १,९६,०८,५३,१२५ ) सृष्ट्यब्दे】【 एकाशीत्युत्तर-द्विसहस्रतमे ( २०८१) वैक्रमाब्दे 】 【 द्विशतीतमे ( २००) दयानन्दाब्दे, काल -संवत्सरे, रवि- दक्षिणायने , वर्षा -ऋतौ, श्रावण – मासे, शुक्ल पक्षे , दशम्यां
तिथौ, ज्येष्ठा
नक्षत्रे, गुरुवासरे
तद्नुसार १५ अगस्त , २०२४ ईस्वी , शिव -मुहूर्ते, भूर्लोके जम्बूद्वीपे, आर्यावर्तान्तर गते, भारतवर्षे भरतखंडे…प्रदेशे…. जनपदे…नगरे… गोत्रोत्पन्न….श्रीमान .( पितामह)… (पिता)…पुत्रोऽहम् ( स्वयं का नाम)…अद्य प्रातः कालीन वेलायाम् सुख शांति समृद्धि हितार्थ, आत्मकल्याणार्थ,रोग,शोक,निवारणार्थ च यज्ञ कर्मकरणाय भवन्तम् वृणे
????????????????????????????
आप निचे घंटी पर क्लिक कीजिए और allow कर के नोटीफिकेशन ऑन कर दिजीए ना…?
वह दिन दूर नहीं खंडित भारत को पुनः अखंड बनाएंगे।
गिलगित से गारो पर्वत तक आजादी पर्व मनाएंगे।।
उस स्वर्ण दिवस के लिए आज से कमर कसें बलिदान करें
जो पाया उसमें खो न जाएं, जो खोया उसका ध्यान करें।।
असंख्य भारतीय क्रांतिकारियों के त्याग एवं बलिदान के प्रतीक 78वें भारतीय स्वतंत्रता दिवस की अप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!






