29 अप्रैल 1979 पुण्यतिथि विषेश, आजाद हिंद सरकार के संस्थापक और वाजपेई जी का निर्दलीय जमानत जब्त करने वाले राजा महेंद्र प्रताप सिंह, पढ़े एतिहासिक स्टोरी

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

आजाद हिंद सरकार के संस्थापक महान स्वतन्त्रता सेनानी राजा महेंद्र प्रताप सिंह (1 दिसम्बर 1886-29 अप्रैल 1979) पुण्यतिथि

राजा महेंद्र प्रताप का जन्म मुरसान के राजा बहादुर घनश्याम सिंह के यहाँ खड्ग सिंह के रूप में हुआ।
बाद में उन्हें हाथरस के राजा हरिनारायण सिंह ने गोद ले लिया व उनका नाम महेंद्र प्रताप रखा।

उन्होने निर्बल समाचार पत्र की स्थापना की व भारतीयों में स्वतन्त्रता के प्रति जागरूकता लाने का काम किया।
वे विदेश गए कई देशों से भारत की स्वतंत्रता के लिए सहयोग मांगा और इसके बाद काबुल अफगानिस्तान में देश की प्रथम आजाद_हिंद_सरकार की स्थापना की।

वहां आजाद हिंद फौज बनाई और अखंड भारत के प्रथम राष्ट्रपति के मानक पद पर आसीन हुए। लेकिन वहां आंतरिक विद्रोहों के कारण उनका उद्देश्य वहां कामयाब नहीं हो सका। तो इन्होंने दयसरी फौज के लिए तैयारियां शुरू कर दी।
अंग्रेजों ने इनके सिर पर इनाम रख दिया था व इसके बाद उनका राज्य हड़प लिया था।
इसके बाद वे दुनिया भर के देशों में समर्थन के लिए घूमे जापान में उन्होंने एग्जेक्युटिव बोर्ड ऑफ इंडिया की स्थापना की इसी का नाम आगे चलकर आजाद हिंद फौज किया गया।

राजा साहब इस बोर्ड के प्रेजिडेंट थे और रास बिहारी बोस उनके उपाध्यक्ष थे।
इस दौरान उन्हें जापान से मार्को पोलो, जर्मनी ने ऑर्डर ऑफ रेड ईगल की उपाधि दी थी। वे चीन की संसद में भाषण देने वाले पहले भारतीय थे। वे दलाई लामा से भी मिले थे।

यह भी पढे…देश मे बढ़ती मुस्लिम जनखंख्या, कही फिर से देश विभाजन के संकेत तो नही, पढ़े यह रिपोर्ट

बहुत से देशों में पहुँचे व भारतीयों पर हो रहे अत्याचार के बारे में विश्व को जागृत किया।दुनियाभर में फैले भारतीयों व उनके संगठनों को एक किया व फौज के निर्माण के।लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने ग़दर पार्टी के साथ मिलकर भी आजादी के लिए कार्य किया व फौज तैयार करने के लिए सारी योजनाएं बना ली।
फिर जापान से सब तैयार कर लिया लेकिन ऐन मौके पर जापानी मनमानी करते दिखे और अपमानजनक शर्ते रखने लगे तो राजा साहब ने उन्हें फटकार दिया और कहा कि वे अपने अनुसार कार्य करेंगे वे देश को आजाद कराने के लिए लड़ रहे हैं न कि फिर से गुलाम करने के लिए।

आजाद हिंद सरकार के संस्थापक

इस पर जापानी बिगड पड़े उन्हे नजरबंद कर दिया। उसके बाद राजा साहब की सहमति से रास बिहारी बोस जी अध्यक्ष बने। इसी बोर्ड का नाम योजना के हिसाब से आजाद हिंद फौज रखा गया और दूसरी आजाद हिंद फौज तैयार हुई।

आप पढना शुरू कर चुके है भारत की लगाम न्युज: अन्य प्रकार एक की खबरो के लिए यहा क्लिक कीजिए 

इस तरह यह फौज एक दिन में नहीं बनी थी बल्कि राजा साहब के पूरे जीवनकाल का तप थी। उसके कुछ समय बाद आजाद हिंद फौज की बागडोर संभालने के लिए नेताजी सुभष चंद्र बोस को बुलाया गया था।
वे विश्वयुद्ध में अंग्रेजो का साथ देने के विरुद्ध थे और उन्होंने इस पर गांधी जी का विरोध किया।

उन्होंने विश्व मैत्री संघ की स्थापना की,उसी तर्ज पर आज uno बनने की शुरुआत हुई थी।
वे 32 सालों तक देश के लिए अपना परिवार छोड़कर दुनिया भर की खाक छानते रहे।
जब वे वापिस भारत पहुंचे तो सरदार पटेल जी की बेटी मणिकाबेन उन्हें हवाई अड्डे पर लेने पहुंची थी।
1952 में उन्हें नोबल पुरस्कार के लिए भी नामित किया गया था।
1909 में वृन्दावन में प्रेम महाविद्यालय की स्थापना की जो तकनीकी शिक्षा के लिए भारत में प्रथम केन्द्र था। मदनमोहन मालवीय इसके उद्धाटन समारोह में उपस्थित रहे।

यह भी पढे…. “ढाई मोर्चे का चक्रव्यूह” पुस्तक का 6 हजार प्री बुकिंग पुरा, क्या-कुछ खासियत है अंकुर आर्य की इस पुस्तक मे, पढने से पहले कही बैंन ना हो जाये

ट्रस्ट का निर्माण हुआ-अपने पांच गाँव, वृन्दावन का राजमहल और चल संपत्ति का दान दिया। राजा साहब श्रीकृष्ण भक्त थे उन्ही के नाम पर उन्होंने देश का यह प्रथम तकनीकी प्रेम महाविद्दालय खोला था।उन्होंने अपनी आधी सम्पति इस विद्यालय को दान कर दी थी।

बनारस हिंदू विश्वद्यालय, अलीगढ़ विद्द्यालय, कायस्थ पाठशाला के लिए जमीन दान में दी। हिन्दू विश्वविद्यालय के बोर्ड के सदस्य भी रहे।

उनकी दृष्टि विशाल थी। वे जाति, वर्ग, रंग, देश आदि के द्वारा मानवता को विभक्त करना घोर अन्याय, पाप और अत्याचार मानते थे। ब्राह्मण-भंगी को भेद बुद्धि से देखने के पक्ष में नहीं थे।

वृन्दावन में ही एक विशाल फलवाले उद्यान को जो 80 एकड़ में था, 1911 में आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तर प्रदेश को दान में दे दिया। जिसमें आर्य समाज आज भी गुरुकुल है और राष्ट्रीय विश्वविद्यालय भी है।
मथुरा में किसानों के लिए बैंक खोला, अपने राज्य के गांवों में प्रारंभिक पाठशालाएं खुलवाई।

उनकी राष्ट्रवादी सोच के कारण कांग्रेस के नेता उन पर RSS का एजेंट होने का आरोप लगाते रहते थे।
उन्होंने चुनावों में बड़े बड़े दिग्गजों को धूल चटा दी थी।

उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार होते हुए भी भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जमानत जब्त करवा दी थी।
उन्होंने छुआछूत को कम करने के लिए दलितों के साथ एक राजा होते हुए भी खाना खाया जो उस समय यह एक असामान्य बात थी। उन्होंने चर्मकार समाज को जाटव की उपाधि दी थी।
उन्होंने अपनी सारी संपत्ति देश और शिक्षा के लिए दान कर दी थी।

अपनी अफगानिस्तान यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी जी ने भी अपने भाषण में इनको नमन किया था।

ऐसे महान दानवीर स्वतन्त्रता सेनानी राष्ट्रवादी समाज सुधारक राजा महेंद्र प्रताप को उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि कोटि नमन।

आप निचे घंटी पर क्लिक कीजिए और allow कर के नोटीफिकेशन ऑन कर दिजीए ना 

Leave a Comment