प्रयागराज: हाईकोर्ट का अहम फैसला: साइबर क्राइम में बैंक खाते फ्रीज करने के नियम स्पष्ट, पूरी खबर पर एक नजर अवश्य डाले

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भारत की लगाम न्यूज
रिपोर्ट: Prince Vidyarthi

हाईकोर्ट का अहम फैसला: साइबर क्राइम में बैंक खाते फ्रीज करने के नियम स्पष्ट

इलाहाबाद, 8 अप्रैल 2026। साइबर अपराधों की जांच से जुड़े मामलों में आम लोगों को बड़ी राहत देते हुए ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जांच एजेंसियां अब पूरे बैंक खाते को फ्रीज नहीं कर सकतीं, बल्कि केवल संदिग्ध राशि पर ही रोक लगा सकती हैं।
न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने 10 याचिकाओं के समूह पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया। इनमें प्रमुख याचिका अशीष रावत ने की थी, जिसमें विभिन्न बैंकों द्वारा साइबर क्राइम शाखा के निर्देश पर खातों को फ्रीज किए जाने को चुनौती दी गई थी।

अधिवक्ताओं की एक टीम ने कोर्ट के सामने रखा अपना पछ 

आकाश कुमार शर्मा, अधिवक्ता अश्वनी कुमार और शमसुल इस्लाम ने महिनों के अथक प्रयास से देशवासियों के लिए एक सुलभ कानून का प्रस्ताव पास कराया

क्या कहा कोर्ट ने

अदालत ने अपने फैसले में कई महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए:

आंशिक फ्रीज का सिद्धांत: पुलिस और जांच एजेंसियां केवल उसी राशि को फ्रीज कर सकती हैं, जो अपराध से जुड़ी प्रतीत हो। पूरे खाते को ब्लॉक करना अनुचित होगा।

बैंक खाता भी ‘संपत्ति’: अदालत ने स्पष्ट किया कि बैंक खाता भी कानून के तहत संपत्ति की श्रेणी में आता है।

पूर्व सूचना जरूरी नहीं: खाता फ्रीज करने से पहले खाताधारक को सूचना देना आवश्यक नहीं है, लेकिन इसके तुरंत बाद मजिस्ट्रेट को सूचना देना अनिवार्य है।

खाताधारक को जानकारी देना जरूरी: फ्रीज करने के बाद बैंक को खाताधारक को कारण और राशि की जानकारी देनी होगी।
कुर्की और अटैचमेंट में अंतर: धारा 106 के तहत कुर्की अस्थायी कार्रवाई है, जबकि धारा 107 के तहत अटैचमेंट के लिए मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक होता है और यह दीर्घकालिक होता है।

आम लोगों को बड़ी राहत

इस फैसले से उन लाखों लोगों को राहत मिलेगी, जिनके बैंक खाते साइबर जांच के नाम पर पूरी तरह फ्रीज कर दिए जाते थे। अब खाताधारक अपने खाते की शेष राशि का उपयोग कर सकेंगे और उन्हें फ्रीज की गई राशि व कारण की स्पष्ट जानकारी भी मिलेगी।

निष्कर्ष

यह निर्णय जांच एजेंसियों की कार्रवाई और नागरिकों के अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करता है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि आम नागरिकों को अनावश्यक आर्थिक परेशानी से भी बचाया जा सकेगा।

(भारत की लगाम न्यूज के लिए विशेष रिपोर्ट)

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