Bkl news network बिहार: Nalanda University History: नालंदा यूनिवर्सिटी को खिलजी ने क्यों जला डाला?
जानिए- दुनिया के सबसे उम्दा नालंदा विश्वविद्यालय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के नालंदा जिले में Nalanda University New Campus का उद्घाटन किया।
सदियों बाद नालंदा विश्वविद्यालय को नई पहचान मिली। लेकिन क्या आप उस नालंदा यूनिवर्सिटी को जानते हैं जिसके टक्कर की कोई दूसरी यूनिवर्सिटी आज तक दुनिया में हो न सकी।
Nalanda University… दुनिया की सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की स्थापना से भी 500 साल पहले जिसका अस्तित्व था। दुनिया जिसे ज्ञान का अद्वितीय केंद्र मानती थी। 90 लाख से ज्यादा पुस्तकों का घर। नालंदा विश्वविद्यालय का इतिहास 7 शताब्दियों से भी लंबा रहा है।
आज वही, Nalanda Ruins या नालंदा का खंडहर के नाम से मशहूर है। उस अभूतपूर्व विश्वविद्यालय को खंडहर में तब्दील करने वाला था बख्तियार खिलजी। आज वो जगह यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट के रूप में संरक्षित है। आज जब नई नालंदा यूनिवर्सिटी का उद्घाटन हुआ है, इतिहास के कुछ पन्ने पलटना भी जरूरी हो जाता है
Nalanda University History: नालंदा यूनिवर्सिटी को खिलजी ने क्यों जला डाला? जानिए- दुनिया के सबसे उम्दा विश्वविद्यालय की 7 खास बा
Nalanda University: दुनिया की पहली रेजिडेंशियल यूनिवर्सिटी
427 ईस्वी में स्थापित, नालंदा यूनिवर्सिटी को दुनिया का पहला आवासीय विश्वविद्यालय माना जाता है। यह प्राचीन समय का एक प्रतिष्ठित संस्थान था, जहां पूर्वी और मध्य एशिया के 10,000 से ज्यादा छात्र शिक्षा ग्रहण करने आते थे।
दलाई लामा ने जिसका लोहा माना, वो Nalanda
पूरे एशिया से लोग यहां चिकित्सा, तर्कशास्त्र, गणित और सबसे महत्वपूर्ण, बौद्ध सिद्धांतों का अध्ययन करने आते थे। यह शिक्षा उन्हें उस समय के सबसे सम्मानित विद्वानों द्वारा दी जाती थी। दलाई लामा ने एक बार कहा था, ‘हमें जो भी बौद्ध ज्ञान प्राप्त हुआ है, उसका स्रोत नालंदा ही है’।
वो नालंदा विश्वविद्यालय खुद आर्यभट्ट थे जिसके लीडर,
ऐसा माना जाता है कि छठी शताब्दी में, भारतीय गणित के जनक (Father of Indian Mathematics) कहे जाने वाले आर्यभट्ट ने इस विश्वविद्यालय का नेतृत्व किया था। विश्वविद्यालय नियमित रूप से अपने सर्वश्रेष्ठ विद्वानों और प्रोफेसरों को चीन, कोरिया, जापान, इंडोनेशिया और श्रीलंका जैसे देशों में बौद्ध शिक्षाओं और दर्शन के प्रचार के लिए भेजता था।
दुनिया का सबसे समृद्ध भंडार Nalanda University
नालंदा पुस्तकालय में 90 लाख से ज्यादा हस्तलिखित, ताड़-पत्र पांडुलिपियां थीं। ये बौद्ध ज्ञान का दुनिया का सबसे समृद्ध भंडार था। यह परिसर इतना विशाल था कि हमलावरों द्वारा लगाई गई आग तीन महीने तक जलती रही। खुलाई में मिला 23 हेक्टेयर में फैला हुआ हिस्सा जो आज मौजूद है, उसे यूनिवर्सिटी के वास्तविक कैंपस का बस एक छोटा सा हिस्सा माना जाता
Nalanda Vishwavidyalaya: जिसे मिटाने की 3 कोशिशें हुईं स्कॉलर बताते हैं कि जिस हमले में नालंदा यूनिवर्सिटी तबाह हुई, वो इस विश्वविद्यालय पर पहला हमला नहीं था। उससे पहले 5वीं शताब्दी में मिहिरकुल के नेतृत्व में हूणों ने इस पर हमला किया था। दूसरी बार फिर 8वीं शताब्दी में बंगाल के गौड़ राजा के आक्रमण से इसे गंभीर नुकसान हुआ था
Bakhtiyar Khilji का नालंदा यूनिवर्सिटी पर आक्रमण
1190 के दशक में, तुर्क-अफगान सैन्य जनरल बख्तियार खिलजी की अगुवाई में आक्रमणकारियों के एक समूह ने विश्वविद्यालय को नष्ट कर दिया। उत्तर और पूर्वी भारत की अपनी विजय के दौरान खिलजी बौद्ध ज्ञान के इस केंद्र को मिटा देना चाहता था।
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खिलजी ने नालंदा यूनिवर्सिटी पर हमला क्यों किया?
उस घटना को आठ शताब्दियों से ज्यादा समय बीत चुका है। कुछ स्कॉलर इस व्यापक मान्यता का खंडन करते हैं कि नालंदा को इसलिए नष्ट किया गया क्योंकि खिलजी और उसके सैनिकों को लगता था कि इसकी शिक्षाएं इस्लाम से प्रतिस्पर्धा करती हैं। हालांकि, बौद्ध धर्म को उखाड़ फेंकना इस हमले के पीछे एक प्रेरक शक्ति हो सकती है, bkl news network
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