यज्ञ दिवस: क्या आप भी 3 मई को अंतर्राष्ट्रीय यज्ञ दिवस मनाते है, आइये जानने है यज्ञ दिवस क्यो और कैसे शुरू हुआ और इसके लाभ..?

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3 मई अंतर्राष्ट्रीय यज्ञ दिवस: वैसे तो यज्ञ एक सनातन परम्परा है, वैदिक काल से ही हवन-यज्ञ प्रतेक परिवार मे सुबह-शाम होता रहा है ।  लेकिन बिच के काल खंड मे कुछ कुरीतीया आ गई,  यह कुरिती धर्म के साथ-साथ यज्ञ मे भी आ गई..?

लेकिन आज समय बदल गया है कुछ लोग जागरूक हो गए है और वेदो की ओर लौट रहे है , अब कुछ घरो मे दैनिक अग्निहोत्र  पुनः शुरू हो चुका है ,

वैसे तो यज्ञ पाच प्रकार के होते है, जिसे प्रतेक मनुष्य को अपने दिनचर्या मे शामिल करना चाहिए

इसे पढे…वेदो के अनुसार: मनुष्य को प्रतिदिन अपने जीवन में यह पाँच महायज्ञ क्यो करनी चाहिए। पढे…?

यज्ञ के उपर तमाम विद्वानो और वैज्ञानिको ने रिसर्च किया है, रिसर्च मे जो रिपोर्ट सामने आई है, उस लाभ का वर्णन तो वर्षो पहले हमारे ऋषि मुनि भी कर चुके है..?

करोना काल मे जब चारो तरफ अफरा-तफरी मची हुई थी तब  विद्वानो ने, गुरूकुल के छात्रो ने, आर्य समाज सहित कई धार्मिक संगठनो ने, दर्जनो देशो के सनातन प्रेमी, यज्ञ प्रेमीओ से बातचीत करके 3 मई को अंतर्राष्ट्रीय यज्ञ दिवस के रूप मे मनाना प्रारंभ किया

और नारा दिया- घर-घर यज्ञ , हर-घर यज्ञ का

जिसके फल स्वरूप देश-विदेश के तमाम शहरो-घरो मे लाखों-लाख लोगो ने यज्ञ किया, और करोना जैसी खतरनाक बिमारी से अपने परिवार के साथ साथ आस-पड़ोस मे रह रहे, करोड़ो जिव-जन्तु , पशु-पक्षी, किडे-मकोडे और मनुष्यो को लाभ पहुंचया

एक रिपोर्ट के अनुसार लगभग 30 देशो के लोगो ने तभी से ही 3 मई अंतर्राष्ट्रीय यज्ञ दिवस मे हर साल हिस्सा लेते है

अतः आप भी हर साल 3 मई को, योग दिवस की तरह यज्ञ दिवस मे भी आहुति डालकर सनातन वैदिक धर्म  के सिद्धान्तो का प्रचार-प्रसार करे

Prince vidyarthi

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