‼️गोवर्धन पर्वत धारण करना क्या था❓‼️
#डॉ_विवेक_आर्य
गोवर्धन त्यौहार मनाया जा रहा हैं। गोवर्धन के विषय में एक कथा प्रचलित है। एक बार वृन्दावन में बहुत वर्षा हुई। गौ और ग्वालों के प्राण संकट में पड़ गए। चारों और भारी जल भराव हो गया। वृन्दावन वासी श्रीकृष्ण के पास इस समस्या के समाधान के लिए उपस्थित हुए। श्री कृष्ण जी ने परामर्श दिया कि गोवर्धन पर्वत पर सभी अपनी गौ-धन लेकर चले। वहां पहुंच कर श्री कृष्ण जी ने अपनी छोटी उँगली पर गोवर्धन के पर्वत को उठा लिया। उसके नीचे सभी सात दिन तक सुरक्षित वर्षा से बचे रहे। इस प्रचलित कथा के स्थान पर युक्ति एवं तर्कसंगत कथा इस प्रकार हैं।
पंडित चमूपति जी अपनी पुस्तक श्री कृष्ण चरित्र में मत भी इसी प्रकार हैं।
श्रीकृष्ण ने समस्या का यही समाधान सोचा कि उन्हें गोवर्धन पर्वत पर ले जाया जाए, उन्होंने यही किया। उन सबको लेकर वहाँ चले गये। पर्वत की खुदाई कराई गई। वृक्ष गिराये गये। साँप, बिच्छू, चीता आदि से वन को खाली कराया गया। सारी बस्ती को गायों के ग्वालों समेत वहीं आवास करा दिया गया। सात दिन तक लगातार वर्षा होती रही, श्रीकृष्ण रात-दिन वहीं डटे रहे। वर्षा की रोकथाम के लिए यज्ञ कराया गया। यही उनका गोवर्धन पर्वत धारण करना था अर्थात गौ का वर्धन अर्थात रक्षा एवं संवर्धन करना।
जो लोग गोवर्धन को श्री कृष्ण जी के चमत्कार के रूप में स्मरण करते हैं। वह वेदों में वर्णित ईश्वर के गुण, कर्म और स्वाभाव से परिचित नहीं हैं। वेदों के अनुसार निराकार ईश्वर में यह समस्त जगत समाहित हैं। अनगिनत पृथ्वी जैसे ग्रह नक्षत्र और आकाशगंगा उसने अपने भीतर उठा रखी हैं। सृष्टि के कण कण में विद्यमान ईश्वर के लिए भला एक पर्वत को उठाना कौन सी बड़ी बात हैं? यह तो उनके गुणों का अवमूल्यन करना हैं।
इसलिए गोवर्धन को उँगली पर उठाना एक अपरिपक्व कल्पित कथन मात्र हैं। वास्तव में श्रीकृष्ण जी की महिमा उनके गुणों को धारण करने में है। हम जीवन में यज्ञ, हवन करें, योग करें, संयम रखे, नियमित ईश्वर की स्तुति-प्रार्थना करे, वेदों का स्वाध्याय एवं पठन-पाठन करे। एक ईश्वर की उपासना करें। गो पालन करें। गाय आधारित खेती करे…?
यही गोवर्धन त्यौहार बनाने का मूल उद्देश्य है।
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