आध्यात्मिक विषय: त्रैतवाद सिध्दांत, क्या ईश्वर जिव और प्रकृति तीन ही अनादि तत्व है, “ब्रह्मांड मे” पढे क्या-कुछ कहता है वैदिक दर्शन

ईश्वर, जीवात्मा एवं प्रकृति विषयक आर्यसमाज के त्रैतवाद का सिद्धान्त ईश्वर- (१) ईश्वर एक है व उसका मुख्य नाम ‘ओ३म्’ है। अपने विभिन्न गुण-कर्म-स्वभाव के कारण वह अनेक नामों से जाना जाता है। (२) ईश्वर ‘निराकार’ है अर्थात् उसकी कोई मूर्त्ति नहीं है और न बन सकती है। न ही उसका कोई लिङ्ग या निशान … Read more

आध्यात्म : दूसरों के सारथी तो बने, परन्तु स्वार्थी ना बने, परोपकारी तो बने, परंतु शोषक ना बने

यदि आप मे योग्यता है तो भाग्य नही बदल सकते ना सही मार्गदर्शन अवश्य करे पढ़े लिखे बुद्धिमान प्रत्येक व्यक्ति में कुछ न कुछ विशेष प्रतिभा होती है। यदि वह कुछ वर्ष उस क्षेत्र में कार्य भी कर ले, तो उसमें अनुभव भी आ जाता है। “ऐसी स्थिति में वह चाहे तो दूसरों का भाग्य … Read more