नई दिल्ली भारत की लगाम न्यूज़ :-संसद के मानसून सत्र के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई सांसदों ने केंद्र सरकार से सवर्ण आयोग के गठन की मांग उठाई। सांसदों का कहना है कि आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर सवर्ण वर्ग की समस्याओं का व्यापक अध्ययन करने, उनकी स्थिति का आकलन करने तथा कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा के लिए एक स्वतंत्र वैधानिक आयोग बनाया जाना चाहिए।
संसद में क्या उठी मांग?
सांसदों ने सदन में कहा कि देश में विभिन्न वर्गों के अधिकारों और हितों के लिए कई संवैधानिक एवं वैधानिक आयोग कार्यरत हैं, लेकिन सवर्ण समाज से जुड़े सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक मुद्दों पर अध्ययन करने वाला कोई समर्पित आयोग नहीं है। उनका तर्क है कि ऐसा आयोग सरकार को तथ्यात्मक रिपोर्ट और नीतिगत सुझाव उपलब्ध करा सकता है।
सरकार का रुख
फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से सवर्ण आयोग के गठन की कोई आधिकारिक घोषणा या अधिसूचना जारी नहीं की गई है। यह विषय अभी सांसदों द्वारा उठाई गई मांग के रूप में चर्चा में है और आगे सरकार के निर्णय पर स्थिति स्पष्ट होगी।
राजनीतिक महत्व
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस मांग पर आगे बढ़ा जाता है, तो इसका प्रभाव सामाजिक न्याय, आर्थिक आधार पर कल्याणकारी नीतियों और सामान्य वर्ग से जुड़े मुद्दों की राष्ट्रीय बहस पर पड़ सकता है।







