वाराणसी के स्वर्वेद महामंदिर की क्या है खासियत? जिसका पीएम मोदी ने किया उद्घाटन
काशी में बने दुनिया के सबसे बड़े स्वर्वेद मंदिर की खासियत जानकर आप भी आकर्षित हो उठेंगे. स्वर्वेद मंदिर को बड़े ही भव्य रूप में बनाया गया है. इस मंदिर को खासियत जानकर आप अपने कदम रोक ही नहीं पाएंगे, क्योंकि इस मंदिर भव्यता लोगों को बहुत आकर्षित करती है.

जानें इस मंदिर की कहानी?
स्वर्वेद मंदिर का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है स्व: और वेद. स्व: का एक अर्थ है आत्मा,वेद का अर्थ है ज्ञान. स्व: का दूसरा अर्थ है परमात्मा,वेद का अर्थ है ज्ञान. जिसके द्वारा आत्मा का ज्ञान प्राप्त किया जाता है, जिसके द्वारा स्वयं का ज्ञान प्राप्त किया जाता है, उसे ही स्वर्वेद कहते हैं. इस मंदिर में किसी विशेष भगवान की पूजा के बजाय मेडिटेशन किया जाता है और यह एक मेडिटेशन स्थल है. मंदिर के सभी तलों पर अंदर की दीवार पर लगभग चार हजार स्वर्वेद के दोहे लिखे हैं. बाहरी दीवार पर 138 प्रसंग वेद उपनिषद, महाभारत, रामायण, गीता आदि के प्रसंग पर चित्र बनाए गए हैं, ताकि लोग उससे प्रेरणा लें सकें.
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क्या है इस मंदिर की खास बात?
यह स्वर्वेद महामंदिर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यह 7 मंजिला है और 35 करोड़ की ज्यादा की लागत से 64 हजार स्कवायर फीट में बनाया गया है. यह दुनिया का सबसे बड़ा मेडिटेशन सेंटर भी है. काशी में बना स्वर्वेद मंदिर 180 फीट ऊंचा है. इस मंदिर में मकराना मार्बल का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें 3137 स्वर्वेद के दोहे लिखे गए हैं. इसमें कमल के आकार का गुंबद भी बना हुआ है, जो दिखने में बहुत ही सुन्दर लगता है, क्योंकि मुख्य गुंबद 125 पंखुड़ियों के विशालकाय कमल पुष्प की तरह है.
चित्र में Prince vidyarthi मंदिर को अपने सेल्फी में कैद करते हुए 🚩
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