शक्तिपुत्र महाराज की वाणी को यथार्थ में बदला पशुपालन विभाग का नाम अब हुआ गौपालन विभाग

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सीधी। धर्म और संस्कृति की गौरवशाली परंपरा को सशक्त करता हुआ एक ऐतिहासिक निर्णय मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लिया गया है। परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज जिन्हें बद्धा भाव से घर्म सम्राट व युग चेतना पुरुष के रूप में जाना जाता है जिनके दिव्य सुझाव पर राज्य शासन ने पशुपालन विभाग का नाम परिवर्तित कर गौपालन विभाग कर दिया है। यह निर्णय न केवल धार्मिक चेतना का सम्मान है, बल्कि गौसंवर्धन के प्रति शासन की प्रतिबद्धता का जीवंत प्रतीक भी बन चुका है। इस निर्णय की पृष्ठभूमि फरवरी माह में डिंडोरी जिले में आयोजित शक्ति चेतना जन जागरण शिविर में देखी जा सकती है. जहां स्वयं पशुपालन मंत्री लखन पटेल की उपस्थिति में श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने गौमाता की गरिमा और भारतीय

संस्कृति में उनके आध्यात्मिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक महत्व को दृष्टिगत रखते हुए यह महत्वपूर्ण सुझाव दिया था। उन्होंने कहा था कि गौमाता केवल पशु नहीं, संस्कृति की शुद्ध चेतना हैं। ऐसे में ‘पशुपालन’ शब्द गौमाता की गरिमा को कम करता है, अतः विभाग का नाम ‘गौपालन विभाग’ किया

जाए। यह वागी एक ऋषि की वाणी थी, जी शासन के हृदय तक पहुँची। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस आध्यात्मिक मार्गदर्शन को आशीर्वाद स्वरूप स्वीकार करते हुए भोपाल में राज्य स्तरीय गौशाला सम्मेलन का आयोजन हुआ। जहाँ विभाग का नाम बदलने की घोषणा की। यह निर्णय

भारतीय मनीषा, गौ-संस्कृति और धर्म आधारित नीति निर्माण की एक ऐतिहासिक मिसाल है। साथ ही यह भी दर्शाता है कि सरकार ऋषियों की दृष्टि और वाणी की केवल प्रेरणा नहीं, नीति मानकर अमल में लाने को तत्पर है । मध्यप्रदेश अब उस पात्रन पथ पर अग्रसर हो रहा है जहां शासन और साधना, धर्म और नीति, परंपरा और प्रगति का समन्वय हो। ‘गौपालन विभाग’ की स्थापना के साथ यह स्पष्ट हो गया है कि भारतीय संस्कृति के मूल तत्य गौ, गंगा, गायत्री और गुरु को यदि राज्य की नीतियों में स्थान मिले, तो एक समरस, संस्कारित और समर्थ राष्ट्र की संकल्पना साकार हो सकती है। यह निर्णय धर्म का सम्मान है, संस्कृति की पुनर्सथापना है, और एक संत की वाणी के प्रति शासन का आदर है।

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