वर्तमान आर्ष गुरुकुलों के आचार्यों के सामने अपने अस्तित्व को लेकर संकट खड़ा हो गया है –
वर्तमान आर्ष गुरुकुलों के आचार्यों के सामने अपने अस्तित्व को लेकर संकट खड़ा हो गया है –
क्योंकि आचार्य अग्निव्रत जी ने वेदार्थ विज्ञानं में निरुक्त का भाष्य करके संसार के समक्ष वेद के मूल स्वरूप (सृष्टि विज्ञान ) को प्रकट कर दिया है ।
अभी तक जैसा आर्ष गुरुकुलो एवं पौराणिको के गुरुकुलों में निरुक्त भाष्य पढ़ाया जाता है, उससे वेद में मांसाहार, नरबलि, पशुबलि, अश्लीलता आदि सिद्ध होती है ।
अब आचार्य अग्निव्रत जी ने निरुक्त का भाष्य करके उसका मूल स्वरूप प्रकट कर दिया , तब उपरोक्त सभी पाप दूर हो गए हैं ।
आचार्य अग्निव्रत जी ने 5 वर्ष पूर्व जब वेद विज्ञान आलोक ग्रंथ की रचना की थी , तभी उन्होंने संदेश दे दिया था कि वेद में ऐसे पाप –मांसाहार, नरबलि, पशुबलि, अश्लीलता आदि नहीं है परंतु आर्ष गुरुकुलों के आचार्यों की हठधर्मिता से उन्होंने अपने पाठ्यक्रम में कोई संशोधन नहीं किया ।
अब आचार्य जी ने निरुक्त का ही भाष्य करके वेद का मूल स्वरूप प्रकट करके सारे पापों से मुक्ति दिला दी ।
अब इन आचार्यों के सामने के तीन विकल्प उपलब्ध है –
पहला विकल्प– सभी गुरुकुल के आचार्य अग्निव्रत जी द्वारा निरुक्त का ही भाष्य पढ़ाए ।
दूसरा विकल्प –आर्ष गुरुकुलों को बंद करके अपने घर बैठ जाएं।
तीसरा विकल्प –अपनी हठधर्मिता बरकरार रखते हुए निरुक्त का अश्लील भाष्य पढ़ाते रहे ।
तीसरा विकल्प हम होने नहीं देंगे , जो तीसरा विकल्प चुनेंगे , उनके खिलाफ हम आंदोलन करेंगे ।
आचार्य जी ने वेदार्थ विज्ञानं में सृष्टि विज्ञान के ऐसे रहस्य प्रस्तुत कर दिए है जो वर्तमान विज्ञान सैकड़ों वर्षों में खोज नहीं पाता।
वैदिक विज्ञान के माध्यम से विश्व में प्रत्येक व्यक्ति को सुख शांति उपलब्ध हो सकेगी ।
“प्रिन्स विद्यार्थी”
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Acharya Agnivrat – आचार्य अग्निव्रत








