पाँच प्रकार के मानव
१ ) असुरा – जो प्राण इन्द्रियों पर आश्रित रहते हुए इन्हीं द्वारा अपना सारा जीवन व्यतीत कर देते हैं । ये सन्तान पर भी उचित ध्यान नहीं देते ।
२ ) पितर – जो पिता बनकर अपनी सन्तान के प्रति अपना कर्तव्य समझकर उन्हें योग्य बनाते हैं , किन्तु परिवार तक ही सीमित रहते हैं ।
३ ) मनुष्या – जो मनन करते हैं । परिवार की सीमा से निकलकर सारे समाज के हित-अहित का विचार कर , सामाजिक गतिविधियों में सम्मिलित होते हैं ।
यह भी पढे..सबसे आकर्षक होगी अनंत अंबानी की शादी, 1200 से 1500 करोड़ ₹ खर्च का अनुमान..?
४ ) देवा – जो सामाजिक गतिविधियों में सम्मिलित होने के साथ उस के सुधार की चिन्ता करते हैं, शासन के सुधार के लिये उसे नई दिशा देने के लिये उसमें सम्मिलित होते हैं।
५ ) ऋषय – ये वो मनीषी है , जो समाज को नई दिशा देने के लिये क्रान्तदर्शी बनकर क्रान्ति का बीज बोते हैं । अथवा परमात्मा दर्शन के लिये अपनी एकान्त साधना में संलग्न रहते हैं । ये लोग समाज को सुधारने के लिये समाज में आकर शासन में सम्मिलित नहीं होते न इन्हें अपना कोई स्वार्थ होता है।
आप नीचे घंटी पर क्लिक कीजिए और allow कर के नोटीफिकेशन ऑन कर दिजीए ना….?








