रवि किशन में फिल्म स्क्रीन का थानेदार बनकर दर्शको को उनके गांव का थानेदार दिखाई दे रहा

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रविकिशन में फिल्म स्क्रीन का थानेदार बनकर दर्शको को उनके गांव का थानेदार दिखाई दे रहा

“लापता लेडीज़” सीरिज में रवि किशन थानेदार की भूमिका में हैं।इतना असली पुलिस वाला पहले कभी हिंदी फ़िल्मों मे देखा हो मैंने याद नहीं।कमाल किया है इस फ़िल्म में रवि किशन ने।वो राजा है अपने थाने के देहाती इलाके का।बस मन की करता है।किसी के बाप से नही डरता।किसी की धौंस मे नही आता।सरेआम ,दिन दहाड़े ,ठोक कर रिश्वत लेता है।यह मान कर लेता है कि यह हक़ है उसका।हर केस के मिज़ाज के हिसाब से रेट फिक्स कर रखे है उसने।एक गाना गाने वाली जब अपने लड़के को पुलिस की गिरफ़्त से छुड़ाने के लिए तय रकम नही दे पाती तो ये बाकी रकम के एवज मे उससे गाना सुन लेता है,पर अपने सिद्धांतों से समझौता नही करता।
फ़िल्म की दो दुल्हनों मे से एक जो ट्रेन मे हुई अदला बदली की वजह से दूसरे दूल्हे के संग उसके थाने वाले गांव मे चली आई है ,उसे भगोड़ी दुल्हन मान कर उस पर नज़र रखता है।उसके इरादे इस लड़की को गिरफ़्तार कर मोटा माल कमाने के हैं।पर जब उसे पता चलता है कि वो लड़की सच्ची है ,आगे पढ़ना चाहती है और उसका पति बदमाश है तो उसके पति के सारे रूपये छीन कर लड़की को उसके चंगुल से आज़ादी भी दिलवा देता है।कृतज्ञ लड़की इसके एवज मे अपने सारे गहने देना चाहती है उसे तो ये पुलिस वाला उससे केवल ससुराल से मिले मंगलसूत्र और कंगन लेना मंजूर करता है और उन्हें निर्विकार भाव से अपने टेबल की ड्रॉज के हवाले कर देता है।
रविकिशन की बॉडी लैंग्वेज कमाल की है।उसकी शातिर आँखें।उसका पान चबाना।बोलने बताने का अंदाज मोह लेगा आपको।ये पुलिस वाला अच्छा भी है और बुरा भी।अपना फ़ायदा सोचता है पर उसके अंदर का इंसान ज़िंदा बना हुआ है। हमारे जैसा ही है ये पुलिस वाला बंदा।हमारे समाज का सच्चा प्रतिनिधि।इस अकेले आदमी ने लापता लेडीज़ को देखने लायक़ फ़िल्म बना दिया है।यदि आज आपके पास फ़ुरसत हो तो आपको इससे मिल ही लेना चाहिए।

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