मैं कृतज्ञ हूं पिता! मैं उऋण होना चाहता हूं। प्रणाम !! युग प्रवर्तक, महर्षि दयानंद सरस्वती द्वि-जन्मशताब्दी पर उन्हें सश्रद्ध शतश: नमन।
सादर नमस्ते! आज हमारा देश आजाद है, और अब हम नित विकास पथ की ओर अग्रसर है । इस विकास की गति मे सब अपने-अपने सामर्थ्य से योगदान कर रहे है ताकि जो अभी भी अभावपूर्ण है वह भावपूर्ण होकर एक भारत श्रेष्ठ भारत का निर्माण हो सके । लेकिन इस एक भारत श्रेष्ठ भारत … Read more