सेना के जवान और उनके परिजनों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला चर्चा में, पीड़ितों ने न्याय की मांग उठाई
भारत की लगाम न्यूज़ गाजीपुर, उत्तर प्रदेश:- उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में एक ब्राह्मण परिवार द्वारा माता के श्राद्ध के अवसर पर ब्रह्मभोज आयोजित किए जाने को लेकर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि थाने में तैनात दरोगा रमेश कुमार ने सेना के एक जवान सुशील पांडेय और उनके परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की तथा धार्मिक नारे लगाने को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां कीं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी आवश्यक है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सेना के जवान सुशील पांडेय ने अपनी माता के श्राद्ध के अवसर पर ब्रह्मभोज का आयोजन किया था। आरोप है कि इसी मामले को लेकर दरोगा रमेश कुमार ने जवान और उनके परिवार के कई सदस्यों को थाने बुलाकर हिरासत में लिया और उनके साथ मारपीट की। पीड़ित पक्ष का दावा है कि इस दौरान कई लोगों को गंभीर चोटें आईं।
‘राम-राम’ बोलने पर अपमानित करने का आरोप
पीड़ित पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया है कि मारपीट के दौरान जब कुछ लोगों ने दर्द से ‘राम-राम’ कहा, तो दरोगा ने कथित तौर पर उन्हें ‘जय भीम’ बोलने के लिए कहा। साथ ही, ब्राह्मणों और क्षत्रियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
यदि ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो मामला पुलिस की निष्पक्षता, नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता और कानून के पालन से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
नौ लोगों को जेल भेजने का दावा
पीड़ित परिवार का आरोप है कि मामले में नौ लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेज दिया गया। परिवार का यह भी दावा है कि चोटिल होने के बावजूद उनका उचित चिकित्सकीय परीक्षण नहीं कराया गया। बाद में न्यायालय से जमानत मिलने के बाद जब वे अपनी शिकायत दर्ज कराने पहुंचे, तो कथित तौर पर उनके साथ अभद्रता की गई और दोबारा मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर थाने से भगा दिया गया।
पीड़ित पक्ष के अनुसार, सुशील पांडेय की हालत विशेष रूप से गंभीर है। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार
इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग उठाई जा रही है। सवाल यह है कि यदि किसी नागरिक के साथ धार्मिक आस्था या जाति के आधार पर दुर्व्यवहार हुआ है, तो उसकी जिम्मेदारी तय कर कानूनी कार्रवाई कब की जाएगी?
प्रमुख मांगें:
1-पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
2- पीड़ितों का उचित चिकित्सकीय परीक्षण कराया जाए और चोटों से संबंधित अभिलेखों की जांच हो।
3- शिकायत के आधार पर निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
4- जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई हो।
5- पीड़ित परिवार और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
महत्वपूर्ण: यह समाचार उपलब्ध कराई गई जानकारी और पीड़ित पक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों पर आधारित है। प्रकाशन से पहले संबंधित थाने का सही नाम, प्राथमिकी, चिकित्सकीय रिपोर्ट, न्यायालय के अभिलेख और गाजीपुर पुलिस का आधिकारिक पक्ष अवश्य सत्यापित किया जाना चाहिए। आरोपों की पुष्टि होने तक इन्हें तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।








