गधे की मजार: पढे..कैसे खेल चलता है पीढी दर पीढी, सच्ची कहानी
गधे की मजार (वीरवार के दिन पीरों-मजारों वालों के लिए विशेष रूप से प्रकाशित) एक फकीर किसी बंजारे की सेवा से बहुत प्रसन्न हो गया। और उस बंजारे को उसने एक गधा भेंट किया। बंजारा बड़ा प्रसन्न था गधे के साथ। अब उसे पेदल यात्रा न करनी पड़ती थी। सामान भी अपने कंधे पर न … Read more
